Kaho Kalidas
छंदों और संवादों से काल को बाँध देने वाले महाकवि का अपना जीवन कैसा रहा होगा? कौन थे कालिदास जिन्हें संस्कृत के श्रेष्ठतम कवि और नाटककार के रूप में जाना जाता है? उन्होंने कहीं भी तो अपना परिचय लिख नहीं छोड़ा है और छोड़ते भी क्यों? एक कवि की कृतियाँ ही तो उसका परिचय होती हैं। फिर भी उनके बारे में कौतूहल इतना है कि हर प्रदेश में उनकी सैकड़ों कथाएँ प्रचलित हैं। कहो कालिदास! इन्हीं महाकवि की कृतियों के आलोक-आभास में, कवि-व्यक्तित्व की तलाश और उनकी प्रेरणाओं की एक कल्पना-प्रधान कथा है। इस कथा में उनकी अद्भुत रचनाओं से झाँकते कवि के हृदय-मन की अनुभूतियों और अनुराग-विराग की छवि-सूत्रों का ताना-बाना बुना गया है। पाँच अद्भुत प्रेम-कथाओं में गुँथी, तत्कालीन समाज और राजनीति की पृष्ठभूमि में पल्लवित, महाकवि की सात कालजयी और मर्मस्पर्शी रचनाओं में मुखरित, यह रचना आपको अंग, अलंकार, प्रकृति और भाव सौंदर्य की लहरियों पर झुलाती हुई—मिलन, आकर्षण तथा रति-भाव के उल्लास—और विरह, प्रतीक्षा एवं स्मृति की मार्मिकता में डुबो देगी।






























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