Man-Samander
जीवन-पथ पर चलते हुए कई ऐसे लोग मिल जाते है, जिनकी बातें, जिनके अनुभव, जिनके जीवन जीने का अंदाज अनजाने ही मन पर अंकित हो जाता है, फिर किसी दिन ऐसा कुछ घट जाता है, कि कहानी लिखने का मन हो जाता है, “मन-समन्दर” की कहानियों में मेरे द्वारा कुछ ऐसे ही भावों को दर्शाया गया है।
मैंने मानवीय संबंधों, स्त्री-पुरूषों के बीच के तरल मनोविज्ञान, आसपास व समाज में घटित घटनाओं को व्यक्त करती हुई यह कहानियाँ लिखी है। यह मेरा प्रथम प्रयास हैं। इसकी त्रुटियों को आप क्षमा करेगें।





























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