Ambashanker Nagar: Shabd Karma Aur Marm
प्रम्लोचा, पतितपावनी और अहल्या ये तीनों प्रबंध काव्य पौराणिक आधार-भूमि पर रचे गये आधुनिक विषय-वस्तु के काव्य हैं जिनमें आधुनिक समस्याओं का वर्णन मात्र न होकर उनके समाधान भी बताए गए हैं। इस दृष्टि से ये काव्य यथार्थ के साथ आदशोंन्मुख हैं। वह आदर्श चाहे प्रेम का हो या हो किसी और विषय का। डॉ. नागर की कविता पौराणिक होते हुए भी पुरातनी-पंथी नहीं है। इन तीनों काव्यों के केन्द्र में नारी है। और वे ऐसी नारियां हैं जिन्हें समाज ने पूरा सम्मान नहीं दिया। नारी के रूप में फिर चाहे वह प्रम्लोचा हो, गंगा हो या हो अहल्या।
डॉ. नागर ने इन तीनों नारियों को अपनी प्रतिभा से उत्कृष्ट चरित्र प्रदान किया है। समाज के नजरिए को बदलने पर बल दिया है। इन तीनों काव्यों की नायिकाओं को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर कवि ने नारी को गरिमा प्रदान की है कि वह देव, दानव, मानव किसी के भी लिए सिर्फ उपभोग की वस्तु नहीं है। वह जीवन की संवाहक है।
डॉ. नागर ने कवि के रूप में प्रबंध, मुक्तक, गीत, गजल, छांदस, अच्छांदस इत्यादि विधाओं में सर्जन किया है, वहीं गद्य में कहानी, निबंध, संस्मरण, रेडियो-वार्ता इत्यादि विधाओं में भी लिखा है। परन्तु डॉ. नागर की पहचान एक सुप्रसिद्ध कवि के रूप में ही है। उन्होंने कवतिाएं बहुत लिखी, पर एक कविता संकलन ‘चांद चांदनी और कैक्टस’ के अतिरिक्त कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं या अभी भी अप्रकाशित हैं। हिन्दी साहित्य में डॉ. नागर का एक प्रबंध कवि के रूप में सदैव के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान रहेगा।






























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