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Dadupanthi Sant Sampradaya Sahitya Evam Kala

ISBN: 9789381005101 Category: Author: Publisher:
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395.00

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Book Condition: New
Format: Paperback
Language: English
Pages: 210

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Dadupanthi Sant Sampradaya Sahitya Evam Kala)

हस्तलिखित ग्रंथों की परम्परा प्राचीन रही है। ये पोथियाँ लेखन के साथ-साथ चित्रित भी की जाती रही है, अतः चित्रकला के पुरा साक्ष्य की दृष्टि से इन हस्तलिखित ग्रंथों का स्थान सर्वोपरि है। भारत में भुर्जपत्र एवं ताडपत्र पर काव्य-लेखन एवं चित्रण की परम्परा प्राचीन समय से चली आ रही है। साथ ही इन ग्रंथों को सुरक्षित रखने एवं सज्जा की दृष्टि से अत्याधिक महत्वपूर्ण है।

कागज एक ऐसा माध्यम है, जिसमें काव्य और चित्रकला दोनों का अंकन सहजता और विस्तार से हो सका। लघुचित्रों की परम्परा का विस्तार मुख्य रूप से कागज की देन है। जिनके फलस्वरूप ग्रंथ चित्रों का निर्माण बड़े पैमाने पर हुआ। जिन्होंने ज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया।

15 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में वैष्णव धर्म के प्रभाव के कारण जैनेत्तर विषय भी चित्रांकन के आधार बनने लगे। राजस्थान में जैनग्रंथों का चित्रण आन्दोलन धीरे-धीरे राम और कृष्ण की लीलाओं तथा नायिका भेद और राग-रागिनी में परिवर्तित हो गया। इस दृष्टि से लगभग 1450 ई. के आसपास पश्चिमी भारत में एक प्रति “गीतगोविन्द” और “बालगोपालस्तुति” चित्रित की गयी जो कृष्ण चरित्र सम्बन्धी प्रथम उपलब्ध अंकन है। अतः यह सुस्पष्ट है कि पश्चिमी भारत में 15 वीं सदी में सांस्कृतिक उत्थान बड़ी तेजी से हुआ।

जैन धर्म के साथ-साथ कृष्ण भक्ति आन्दोलन ने भी कलान्तर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही नहीं मध्यकाल में यहाँ निर्गुण भक्ति की ज्ञान शाखा के प्रसार आन्दोलन के फलस्वरूप अनेक संत सम्प्रदाय भी पनपे, जैसे-दादूपंथ, विश्नोई – सम्प्रदाय, निरंजनी, जसनाथी, लालदासजी, रामस्नही आदि पंथ जो यहाँ की विशिष्ट देन कही जा सकती है। इसके साथ ही देश के अन्य निकटवर्ती प्रान्तों में चल रही धार्मिक परम्पराओं और आन्दोलनों का भी प्रभाव यहाँ बहुत रहा। साथ-साथ पनप रही इन परम्पराओं ने समूचे जन-जीवन पर सम्मिलित प्रभाव डाला है तथा एक दूसरे की परम्पराओं को आदान-प्रदान द्वारा प्रभावित, समृद्ध और समन्वयात्मक रूप से पुष्ट किया हो यह स्वाभाविक ही नहीं, अनिवार्य भी है। इसी परम्परा में दादूजी का सम्प्रदाय भी राजस्थान की प्रमुख और विशिष्ट देन है। जिसके फलस्वरूप इनके सत साहित्य की जैन साहित्य व

Weight.350 g
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Country of Origin

India

Language

English

Pages

210

Product Form

Paperback

Publishers

Raj Publishing House

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