0.00
0

Hawa Mein Tehra Sawaal

ISBN: 9788189326623 Category: Author: Publisher:
ISBN: 9788189326623 Category: Author: Publisher:
Price:

395.00

Price:

395.00

Book Condition: New
Format: Hardcover
Language: English
Pages: 110

Availability: In stock


Deals
Deals
Deals
Days
Hours
Minutes
Seconds

Hawa Mein Tehra Sawaal

गोपाल सहर की ये कहानियाँ हमें एक साथ कई स्तर पर उद्वेलित करर्ती हैं और सवाल उठातीं हैं एवं मज़बूर करतीं हैं कि हम नज़रें चुराने की बजाय इन सवालों से मुठभेड़ करें। अधिकतर कहानियाँ पारिवारिक पृष्ठभूमि की हैं। विघटित होते जा रहे जीवन मूल्यों का मासूम बच्चों की मनःस्थिति पर कितना विपरीत प्रभाव पड़ता है यह हवा में ठहरा सवाल, सब कनिंग करते हैं, तथा असमंजस कहानियों में पूरी संवेदनात्मक गहराई के साथ उपस्थित है। बच्चे मेघ द्वारा पूछा गया यह सवाल, पापा, मेरा चेहरा किससे मिलता है? और उत्तर में माँ द्वारा मुँह नीचा कर लेना बच्चे की दुनिया में एक तनाव की सृष्टि करता है जिससे वह सहज नहीं रह पाता। प्रकारांतर से यही सवाल सब कनिंग करते हैं और असमंजस में भी है। बड़ों के भटकाव की ये कहानियाँ बच्चों के मुँह से कहलायी गईं हैं जो कि एक मौलिक प्रयोग है। संग्रह की कहानियों में जो नारी पात्र आए हैं वे अपनी सारी कमजोरियों के साथ चित्रित हुए हैं। सहर तमाम खतरे उठाते हुए यथार्थ को पूरी तटस्थता के साथ अभिव्यक्त करने में विश्वास करते हैं। बिट्टीन की नायिका सूरज से विवाह करती है। उसके सपनों का चाँद कहीं दूर गगन में ही रह जाता है। वह सूरज की तपिश को बर्दाश्त नहीं कर पाती, चाँद की ठंडक को आत्मसात कर लेना चाहती है। नारी की इस ऊहापोह की स्थिति को गोपाल सहर ने सूरज और चाँद प्रतीकों के माध्यम से उजागर किया है। फांस कहानी बिटवीन के आगे की स्थिति है जिसके चलते पुरुष की ज़िंदगी नारकीय हो जाती है।

कहानीकार लगातार आत्मकेंद्रित होते जा रहे लोगों की इस दुनिया में टूटते-रिश्तों को बचाने के लिए विकल है कि रिश्तों की उष्णता बची रहे। इस दृष्टि से टूटते बनते पुल एक उल्लेखनीय कहानी है। माँ जब अपने अफसर बेटे से मिलने गाँव से शहर जाती है तो बेटे की घुटन भरी जिंदगी देखकर स्वयं भी घुटकर रह जाती है। अभिजात संस्कारों की बहू का सभी के प्रति उपेक्षापूर्ण व्यवहार उसे कहीं भीतर तक छलनी कर देता है और वह शीघ्र ही पुनः गाँव लौट जाती है। परंतु जब बहू के एक्सीडेंट का समाचार मिलता है तो मदद के लिए दौड़ी चली जाती है। यह अपनापन और सद्भाव रिश्तों में आयी दरार को भर देता है। गोपाल सहर की कहानियों में ब्योरों की बारीकी, परिवेश का सांगोपांग चित्रण और पात्रों की मनःस्थिति पर पकड़ कहानियों को विश्वसनीय बनाते हैं। तुम्हारे बिना यह संसार पिता की स्मृति को समर्पित मार्मिक कहानी है। जहाँ पिता को आत्मीयता व आदर के साथ याद करते हुए देखना हमारे अंतस को सुकून से भर देता है।

इन कहानियों की एक और विशेषता रेखांकित करने योग्य है। मौजूदा परिवेश में रिश्तों की उष्मा गायब होती जा रही है उसी प्रकार हिन्दी कहानी से गाँव विदा होते जा रहे हैं। लेकिन इन कहानियों में गाँव एक स्मृति बिम्ब की तरह बार-बार आता है और इस तरह आता है जैसे कोई जीता जागता पात्र हो। दूसरी ओर शहर में चेतन भी जड़ की तरह है। इसी जड़ता से घबराकर सब कनिंग करते हैं का पोता गाँव में दादी के साथ बिताए क्षणों को यों याद करता है, दादी के घर कण-गिर जाए तो दादी कहती है, कीड़े मकोड़े भी रहते हैं घर में। दादी खाने बैठती है तो न जाने कितने चिड़ा-चिड़कली साथ मिल बैठकर खाना खाते हैं। भूमंडलीकरण के भरमाये और बाज़ार की बाजीगरी से चौंधियाए लोग इस बात को नहीं समझ पाते हैं।

गोपाल सहर लगभग प्रत्येक कहानी में यह कोशिश करते हुए दिखाई देते हैं कि आधुनिकता के अंधकार में डूबे मनुष्य की जड़ता टूटे, वह फिर से जिंदगी की रेलमपेल में सम्मिलित हो, रिश्तों से जुड़ाव महसूस करे। पाठकों द्वारा इन कहानियों का स्वागत किया जाएगा ऐसा विश्वास है।

Weight.320 g
Book Condition

New

Country of Origin

India

Language

English

Pages

110

Product Form

Hardcover

Publishers

Raj Publishing House

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Hawa Mein Tehra Sawaal”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recognized by Amazon – 4 Years in a Row.

Recognized by Amazon

4 Years in a Row

Popular With Our Readers

Talekart India

Talekart India

Need Help? Chat with us on Whatsapp

I will be back soon

Talekart India
Hi 👋 ✦ Namaste 🙏
WhatsApp