Har Manzil Hogi Aasaan
भारत के सबसे चहेते संत, गौर गोपाल दास (जिनके 2.5 करोड़ से भी ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं) की दिल को छू लेने वाली किताब|
हममें से ज़्यादातर लोग अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों के पीछे भागते हुए बिताते हैं – खुशी, प्यार, अच्छी सेहत, वित्तीय आज़ादी और बहुत कुछ।
– लेकिन क्या सच में हर मंज़िल इतनी आसान है?
गौर गोपाल दास, नवंबर की एक ठंडी सुबह में, अपने दोस्त राकेश अरोड़ा के बेटे की तीन दिन तक चलने वाली शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए जैसलमेर पहुँचते हैं। वहीं उनकी मुलाक़ात अरोड़ा परिवार और होने वाली दुल्हन के परिवार से होती है। जैसे-जैसे शादी का दिन पास आता है, एक बिन-बुलाया मेहमान अचानक सामने आ जाता है| वे दोनों परिवारों को तोड़ने की धमकी दे रहे उस तूफ़ान को देखते हैं।
अपने मेज़बान और उनके मेहमानों के साथ बातचीत के दौरान, अपनी सहज और शांत मौजूदगी के साथ, वे उनके दिलों में छिपी उन इच्छाओं और डरों को सामने लाते हैं, जिन्हें वे लंबे समय से अनदेखा करते आ रहे थे| इसी बीच वे उन्हें संतुलित और समझदारी भरी सलाह देते हैं, और साथ ही अपनी ज़िंदगी के उतार-चढ़ावों से भरी यात्रा भी साझा करते हैं।
हर मंज़िल होगी आसान गौर गोपाल दास की निजी और गहरी बयानगी है — एक ऐसी दिलचस्प किताब जो उन लोगों के लिए बदलाव का रास्ता पेश करती है, जो महत्वाकांक्षा और संतुष्टि, प्रयास और अस्तित्व के बीच फँसे हुए हैं| दिलचस्प संवादों, गहरी संवेदनशीलता और सौम्य ज्ञान के साथ, यह किताब हमें बताती है कि हमारी सोच ही हमारी वास्तविकता को आकार देती है| इसीलिए ज़रूरी है कि हम अपने ब्लाइंड स्पॉट्स को पहचानें और उनसे ऊपर उठना सीखें, और अपने भीतर वह करुणा विकसित करें जिसकी हमें ज़रूरत है, ताकि हम इस खूबसूरत और जटिल जीवन को बेहतर तरीके से जी सकें।






























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