Madhushala
मधुशाला की आलोचना नहीं वरन प्रशंसा करनी चाहिए, क्योंकि इसमें सूफीवाद का दर्शन होता है’
महात्मा गांधी
मधुशाला हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन का अनुपम काव्य है। इसमें एक सौ पैंतीस रुबाइयां (यानी चार पंक्तियों वाली कविताएं हैं।
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मधुशाला की हर रुबाई मधुशाला शब्द से समाप्त (शराब), साकी (शराब पडोसने वाली), प्याला होती है। हरिवंश राय बच्चन ने मधु, मदिरा, हाला (कप या ग्लास), मधुशाला और मदिरालय की मदद से जीवन की जटिलताओं के विश्लेषण का प्रयास किया है। मधुशाला जब पहली बार 1935 में प्रकाशित हुई तो शराब की प्रशंसा के लिए कई लोगों ने उनकी आलोचना की। लेकिन गांधी जी ने
बाद के दिनों में मधुशाला इतनी मशहूर हो गई कि जगह-जगह इसे नृत्य-नाटिका के रूप में मशहूर नृत्यकों ने इसे प्रस्तुत किया। मधुशाला की चुनिंदा रुबाइयों को मन्ना डे ने एल्बम के रूप में प्रस्तुत किया। इस एल्बम की पहली कविता स्वयं बच्चन ने गाई। हरिवंश राय बच्चन के पुत्न अमिताभ बच्चन ने न्यू यॉर्क के लिंकन सेंटर सहित कई जगहों पर मधुशाला की रूबाइयों का पाठ किया।





























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