Ek Viphal Rajneetik Yatra
राजनीतिक दलों में अक्सर अपने विचारों और नीतियों के आधार पर एक दूसरे के साथ टकराव उत्पन्न हो जाता है लेकिन जब उनके हितों की बात आती है या सत्ता पर खतरा मंडराता है तो वे हितों को साधने के लिए आपसी मिलीभगत से गुप्त समझौता करने में भी परहेज नहीं करते।
प्रस्तुत पुस्तक मेरी राजनीतिक यात्रा के विभिन्न पड़ावों की कहानी कहती है जिसमें मेरे द्वारा पूरी तैयारी के साथ विधान सभा में उठाये गये मामलों का विवरण दिवा गया है। यहां मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि मेरे द्वारा उठाये गये मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित होने के बाद भी अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुँच पाये।
पुस्तक में मैंने जो कुछ भी लिखा है, वह एक ऐसा सम्पूर्ण सत्य है जिसे सत्तासीन शक्तिशाली लोगों ने परिणति तक नहीं पहुंचने दिया तथा जिसे विभिन्न स्वतंत्र संवैधानिक संस्थानों का अप्रत्यक्ष सहयोग मिलने और प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के बीच हुए एक प्रच्छन्न तालमेल के तहत सफलतापूर्वक अवरुद्ध कर दिया गया।
इस पुस्तक के माध्यम से सक्रियतावादी राजनीतिक प्रतिनिधियों से यह अपेक्षा है कि जब वर्तमान में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चरम पर है और वे बिना किसी तालमेल के स्वतंत्रतापूर्वक कार्यवाही करने को अभ्यस्त हैं तो इन तथ्यों को भी सार्वजनिक हित में परिणति तक पहुंचाने का प्रयास करें। जनहित को सुरक्षित रखने के लिए राजनीति में शुचिता तथा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक भी है।






























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