Lolita
लोलिता’ अपने समय में ही चर्चा के केंद्र में आ गया था। जैसे-जैसे समय गुज़रता गया इस उपन्यास ने ख्याति के शिखर छूने शुरू कर दिये। एक किशोर लड़की की यौन अपेक्षाओं, विचलन और छटपटाहटों के बावजूद एक अधेड़ पुरुष की वासनाओं की शिकार होते रहने की बाध्यताओं के चलते ‘लोलिता’ की जिंदगी को चित्रित करना वास्तव में नाबकोव के वश की ही बात थी। यह उपन्यास विकृत यौन मनोवृत्तियों की वकालत नहीं करता, बल्कि उसकी बारीकियों को मुखर करते हुए किशोर यौन मनोविज्ञान की जटिलताओं को रोचक ढंग से उद्घाटित करता है। प्रतिबंध और विरोध के झटकों से गुजरते हुए भी आज तक उपन्यास ने दुनिया-भर के करोड़ों पाठकों के बीच लोकप्रियता हासिल कर रखी है।






























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