Hanuman ki Geeta
भक्ति, ज्ञान और आत्मचिंतन का एक सुंदर सेतु” —महंत श्री गोपाल दास, श्री काले हनुमान जी मंदिर, चाँदी की टकसाल, जयपुर “इस साहित्य (पुस्तक) पर निश्चित ही अंशु हर्ष जी ने चिंतन के साथ अपनी विचार-प्रभा को रूप दिया है… मैं उन्हें बधाई देता हूँ!” —पं. विजयशंकर मेहता, विद्या वाचस्पति, “हमारे हनुमान परिवार”, उज्जैन “यह न केवल हनुमान जी की दृष्टि से गीता को जानने का एक प्रयास है, बल्कि उनके माध्यम से हमें यह समझने की प्रेरणा भी देता है कि इस अद्वितीय ज्ञान को हम अपने जीवन में किस प्रकार अपना सकते हैं।” —अंशु हर्ष, लेखक जहाँ-जहाँ राम का नाम रहेगा, वहाँ-वहाँ हनुमान जी भी रहेंगे। जहाँ-जहाँ धर्म की रक्षा होगी, वहाँ-वहाँ हनुमान जी का आशीर्वाद रहेगा।






























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