PASHU- PAKSHIYO KI ROCHAK KAHANIYA
एक बार की बात है। बिली नामक बकरा गांव से भटक कर जंगल की ओर चला गया। जंगल में बहुत-सी हरी घास थी। वह बड़े मजे से घास चरने लगा। अचानक उसे अपने पीछे कुछ हलचल महसूस हुई। उसने देखा कि पेड़ों के पास खड़ा एक बड़ा-सा भालू उसे घूर रहा था।
बिली मन ही मन डर गया। लेकिन उसे यह भी पता था कि अगर उसने अपना डर दिखाया, तो भालू उसे एक मिनट में फाड़ कर खा जाएगा। उसने निश्चय किया कि वह बहादुर बनने का दिखावा करेगा। इसलिए वह भालू को अनदेखा-सा करता हुआ घास चरता रहा।
भालू ने उसे देख कर सोचा, ‘कैसी मजेदार बात है! मुझे देख कर इसे डर ही नहीं लग रहा है। कितने मजे से यह घास चर रहा है। मेरी ओर देख तक नहीं रहा है।
भालू धीरे-धीरे आगे बढ़ा, ताकि उस विचित्र जानवर को पास से देख सके। उसके सिर पर तीखे खंजरों जैसे दो सींग थे। उसके पीछे एक छोटी-सी चीज हिल रही थी। गले के दोनों ओर बड़े-बड़े पंखे लटक रहे थे






























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