Akbar Birbal Ki Rochak Kahaniyan
एक बार की बात है, बादशाह अकबर अपने दरबारियों के साथ शिकार खेलने के लिए जंगल में गए। वे शिकार खेलते-खेलते अपनी राजधानी आगरा से बहुत आगे निकल आए। उस शाम अकबर की चाल थोड़ी धीमी थी। उनके कुछ दरबारी चुस्ती से, उनसे आगे निकल गए। बादशाह अपने कुछ दरबारियों के साथ पीछे रह गए। जंगल में दिन ढलने लगा और वे महल तक जाने का रास्ता भूल गए। वे सभी जंगल से बाहर आने का रास्ता खोजने लगे। तब तक, उन्हें भूख और प्यास भी सताने लगी।
कुछ ही देर बाद, उन्हें जंगल में एक रास्ता दिखाई दिया। बादशाह और उनके दरबारी तेजी से रास्ते की ओर बढ़ने लगे। उन्हें लगा कि अब वे बड़े आराम से, अकबर की राजधानी आगरा तक जा सकते थे। जब वे आगे बढ़े, तो पाया कि वह रास्ता भी आगे से दो अलग रास्तों में बंट रहा था। वे सभी चकरा गए और आपस में बहस करने लगे कि उन्हें किस रास्ते से जाना चाहिए।
बादशाह अकबर भी परेशान हो गए और अपने-आप से बोले, “मैं कैसे पता लगाऊं कि महल की ओर कौन सा रास्ता जाता है? मेरे साथ-साथ मेरे ये दरबारी मित्र भी भूखे और प्यासे हैं। हमें किसी तरह जल्दी ही राजधानी पहुंचना होगा।”






























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