Hindi Sahitya ka Itihas
अहिन्दी भाषा ३० प्रान्तों में हिन्दी भाषा और साहित्य का प्राचीन, मध्यकालीन और स्वातंत्र्य (आधुनिक) काल का क्रमिक विकास हुआ है। इसके साथ आर्य और द्रविड़-परिवार की भाषाओं में अनेक समानताएँ हैं। इस सन्दर्भ में अनेक प्रामाणिक कार्य देशी-विदेशी भाषा वैज्ञानिकों द्वारा हो चुके हैं। यह कार्य सबको दृष्टि में रखकर किया गया है। इसमें प्राचीन से लेकर हिन्दी की अद्यतन विधाओं के भाषा-साहित्य पर सर्वेक्षण, शोध, समीक्षा, विश्लेषण, संश्लेषण, निष्कर्षात्मक और ऐतिहासिक पद्धतियों से कार्य किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी, ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी, मीडिया एवं व्यावहारिक रूपों को सोदाहरण प्रस्तुत किया गया है।
प्रस्तुति-व्यवस्था को अधोलिखित क्रम दिया गया है-
१. भारत के अहिन्दी भाषी प्रान्त।
२. अहिन्दी भाषी प्रान्तों में हिन्दी भाषा का विकास व स्वरूप।
३. अहिन्दी भाषी प्रान्तों में हिन्दी साहित्य का विकास व स्वरूप।
४. अहिन्दी भाषा प्रान्तों में हिन्दी का व्यावहारिक रूप। ५. अहिन्दी भाषी प्रान्तों में मीडिया और फिल्मों में हिन्दी।
६. अहिन्दी भाषी प्रान्तों एवं हिन्दी भाषी प्रान्तों के मध्य हिन्दी- (१) हिन्दी-प्रचार-प्रसार के सन्दर्भ में,
(२) हिन्दी आन्दोलन के सन्दर्भ में, (३) हिन्दी
आज के सन्दर्भ में।
इस प्रकार मेरे द्वारा लिखे जा रहे सात भागों में हिन्दी साहित्य का इतिहास का यह भाग तीन अपना विशेष स्थान बनाता है। अन्धकार में पड़ी प्रचुर सामग्री का इसमें उपयोग किया गया है। प्रामाणिक रूप से अखण्ड भारत का हिन्दी-स्वरूप इसमें चित्रित हो गया है। हिन्दी भाषा और साहित्य के लिए सम्पूर्ण भारत के लिए यह उपयोगी है। अनेक रूढ़ियों और सीमाओं से ऊपर उठकर यह नये ढंग का कार्य है। इसमें क्षेत्रीयता को महत्त्व दिया गया है, परन्तु समग्रता को कहीं भी उपेक्षित नहीं किया जाता है।






























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