Ganeshgita
सिद्धि और बुद्धि के स्वामी तथा जीवन की विघ्न-बाधाओं को दूर करनेवाले शुभकर्ता दुःखहर्ता श्रीगणेश ने द्वापर युग में हुए अपने अवतार में जो शिक्षाएँ दीं वे ही गणेशगीता कहलाती हैं। इस गीता में अन्य सभी गीताओं से भिन्न आधुनिक युग में उपयोगी शिक्षाएँ हैं। अन्य गीताओं में आत्मा, भक्ति, और मोक्ष जैसे विषयों पर जोर दिया गया है। गणेशगीता में ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक सिद्धान्तों से लक्ष्य प्राप्ति और साधना-उपासना से मानसिक सामर्थ्य विकसित करने के सूत्र समझाए गए हैं। इस ग्रंथ में सहज गणेश-कृपा प्राप्त करने के नितान्त व्यावहारिक अभ्यासों और विधियों का ज्ञान है। पारिवारिक, सामाजिक तथा निजी जीवन में सन्तुलन बनाए रखने की उपयोगी शिक्षा इस ग्रंथ में है। नई पीढ़ी को बुद्धिमत्ता, ज्ञान, और सफल जीवन जीने के मार्ग पर चलने की प्रेरणा यह ग्रंथ देता है।






























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