Daityon Ki Rahasyamayi Kahaniya
बहुत जोरों से वर्षा हो रही थी। ऐसी मूसलधार बारिश हो रही ॥ थी कि कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था। लेकिन मार्क को ऐसी बारिश बहुत अच्छी लगती थी। उसे पानी से भरे गड्ढों में दौड़ने और छप-छप ॥ करने में बड़ा मजा आता था। जब बारिश रुक जाती, तो वह मेढकों और कीड़ों की खोज में निकल पड़ता था।
आज भी मार्क घर से बाहर जाने के लिए बेचैन था, लेकिन वह नहीं जा सकता था। उसकी मम्मी दादी जी के घर चली गई थीं। ॥ तेज बारिश के कारण उनके घर की छत से पानी टपक रहा था। इधर पापा जी भी काम पर चले गए थे।
ऐसा पहली बार हुआ था। अंधेरा होने के बाद मार्क अपने घर में अकेला था। आज वह खुद को बहुत बहादुर महसूस कर रहा था। अचानक उसने बाहर की ओर देखा। उसे महसूस हुआ कि खिड़की के पास कोई खड़ा है। वह आकृति बिल्कुल स्थिर खड़ी थी और मार्क की ओर एकटक देख रही थी।






























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