Uttar Bharatiya Sangeet mein Prachalit Pramukh Vadh Yantra
प्रमोद सिंह भारतीय शास्त्रीय संगीत के गंभीर अध्येता, समर्पित शोधार्थी एवं संगीत-शिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय साधक हैं। संगीत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनके शैक्षणिक एवं शोधपरक जीवन प्रवास में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने संगीत विषय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियाँ प्राप्त कर विद्या के क्रमिक अनुशीलन को सुदृढ़ आधार प्रदान किया है, साथ ही शिक्षा स्नातक (बी.एड.) की उपाधि अर्जित कर संगीत शिक्षण की विधियों एवं मनोवैज्ञानिक आयामों को भी गहनता से आत्मसात किया है। यूजीसी नेट परीक्षा को लगातार चार बार उत्तीर्ण कर अपनी विद्वत्ता, एकाग्रता एवं विषय के प्रति गहन अधिकार का परिचय दे चुके हैं। वर्तमान में संगीत के उच्च शिक्षा क्रम में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर से पीएच.डी. शोधकार्य में संलग्न हैं प्रमोद का अध्ययन एवं अभिरुचि क्षेत्र उत्तर भारतीय संगीत पद्धति के विविध आयामों। विशेषतः गायन, वादन, संगीत कला का इतिहास एवं संगीत के शास्त्रीय सिद्धांतों पर-केंद्रित है। साधना एवं शोधपरक अभिरुचि को निरंतर दिशा देते हुए अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 10 शोध-लेख प्रकाशित हुए हैं, जो उनके चिंतन की गहराई, विश्लेषणात्मक दृष्टि एवं अकादमिक अनुशासन को अभिव्यक्त करते हैं।
एक लेखक के रूप में प्रमोद सिंह संगीत को केवल एक कला के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक-संवेदनात्मक परंपरा के रूप में देखते हैं, जिसकी जड़ों में अनुशासन, साधना और सौंदर्यबोध का समन्वय निहित है। वे अपने लेखन एवं शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की गरिमा, परंपरा और तात्त्विक सौंदर्य के प्रति सजगता विकसित करने हेतु निरंतर प्रयत्नशील हैं।
प्रमोद सिंह एक ऐसे संगीत साधक हैं, जिनका व्यक्तित्व अनुशासन, अध्ययन, अनुसंधान, शिक्षण एवं
सृजन-इन सभी आयामों में संतुलित एवं प्रेरणास्पद है।






























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