Naksal Mukt Bharat
माओवाद का अंत : एक ऐतिहासिक विजय और ‘नक्सल-मुक्त भारत’ की विजय गाथा पाँच दशकों तक मध्य भारत को लहूलुहान करने वाला लाल आतंक अब इतिहास के पन्नों में सिमट रहा है। इसने न केवल सरकारी सत्ता को चुनौती दी, बल्कि आदिवासी समुदायों को आतंकित किया और ‘क्रांति’ के नाम पर उग्रवादी क्रूरता को सामान्य बना दिया। 1967 के नक्सलबाड़ी विद्रोह से शुरू हुई यह हिंसा, जो कभी देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती थी, अब निर्णायक रूप से परास्त हो चुकी है। सुरक्षा, राजनीति और आर्थिक बदलाव का अनूठा संगम, ‘नक्सल-मुक्त भारत’ राष्ट्रीय सुरक्षा, सुशासन और भारत के विकास पथ में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक अनिवार्य अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। प्रसिद्ध लेखक और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा और सहलेखक डॉ आलोक कुमार द्विवेदी की पुस्तक ‘नक्सल-मुक्त भारत’ उस संकल्प की विजय यात्रा है, जिसने 31 मार्च 2026 की समयसीमा तक भारत को नक्सलवाद के दंश से मुक्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।


























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