Nargis Aur Narangi
प्रकृति करगेती का कहानी-संग्रह ‘नरगिस और नारंगी’ यथार्थ और कल्पना के बीच उस जगह से अपनी दुनिया रचता है, जहाँ साधारण दिखने वाली चीज़ें अचानक बोलने, प्रेम करने, दुखी होने और मनुष्य को उसका चेहरा दिखाने लगती हैं।
शीर्षक कहानी में नरगिस नाम की स्मार्ट डिवाइस और नारंगी रंग के मोटर-अलार्म के बीच पनपता अनोखा प्रेम है; ‘ज़बर्ज़स्त रॉयल्टी’ साहित्य और प्रकाशन की दुनिया पर खिलंदड़ा व्यंग्य करती है; ‘बिल्लन’ अदृश्यता, अकेलेपन और अपनाए जाने की इच्छा को छूती है; ‘एडम’ आकर्षण और प्रेम की विडंबनाओं से खेलती है; ‘ट्रेन की पटरियाँ’ मृत्यु को डार्क कॉमेडी में बदल देती है, जबकि ‘एक थी ओ-ज्यू’ पहाड़ी जीवन, लोकविश्वास, इच्छाओं, बाज़ार और मानवीय लालच को जादुई कथा में पिरोती है।
इन कहानियों में स्त्री-अनुभव, संबंध, अकेलापन, शोक और हिंसा हैं, लेकिन भावुकता का अतिरिक्त बोझ नहीं। फैंटेसी, जादुई यथार्थ, व्यंग्य और बेबाक समकालीन भाषा के सहारे प्रकृति परिचित संसार को थोड़ा तिरछा करके दिखाती हैं—और उसी तिरछेपन में उसके कई असुविधाजनक सच साफ़ दिखाई देने लगते हैं।


























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