Sangitika
संगीतिका’ को तैयार करने का उद्देश्य पूज्य गुरूजी ‘वेदमणि सिंह ठाकुर’ को छोटा सा सम्मान देना हैं। इतना हुनर होने पर भी कैसे सहज-सरल रहना तथा बड़े-बड़े सम्मान पाने के बाद भी कभी प्रसिद्धि की चाह न रखने की इच्छा ही उनकी महानता को प्रदर्शित करता है। गुरूजी द्वारा भजन, गीत, ग़ज़ल, लोकगीत आदि की बहुत आकर्षित रचनायें सृजित की गई है तथा बहुत सी रचनाओं को स्वयं संगीत बद्ध भी किये हैं।
संगीत और साहित्य दोनों में पारंगत होने के कारण इनकी रचनाओं में एक विशेषता दिखाई देती हैं वैसे इनकी रचनाओं को उँगलियों पर गिन पाना कठिन है फिर भी श्री जगदीश मेहर के मार्गदर्शन में चुनिंदा 100 गीतों को संकलित कर पुस्तक का स्वरुप देकर सुधी पाठकों के समक्ष प्रस्स्तुत करना, मेरे द्वारा अपने गुरूजी के प्रति आस्था रूपी एक छोटी-सी भेंट हैं। ये रचनायें विभिन्न अंदाज, मिजाज़ एवं मौसम के अनुसार चुनी गई हैं। अतः मुझे पूरा विश्वास है कि हर उम्र के साहित्य एवं संगीत प्रेमियों के मन को भायेंगी। कला गुरू अपनी गीत रचनाओं में ‘बेद’ तथा ग़ज़ल आदि में ‘बेदम’ लिखते हैं






























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