Nirmala
यह उपन्यास दहेज, उम्र के असमान विवाह और समाज की कठोर अपेक्षाओं पर एक गंभीर, संवेदनशील दृष्टि प्रस्तुत करता है। निर्मला के जीवन में आने वाले संकट उस समय के पारिवारिक ढाँचे की कमज़ोरियों को स्पष्ट रूप से सामने लाते हैं। प्रेमचंद ने करुणा और संयम के साथ इस सामाजिक समस्या का मार्मिक चित्रण किया है।





























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