उपन्यास सम्राट के अलंकरण से दुनिया भर में नवाज़े गए महान कथा-शिल्पी प्रेमचन्द की सम्पूर्ण कहानियाँ लगभग 300 होंगी। इस कथा याना को उनके बहुचर्चित मानसरोवर के 8 खंडों में समेटा गया है। प्रेमचन्द के कथा-संसार की मानसरोवर सीरीज़ अपने-आप में एक पहचान बन चुकी है।
इसमें मानसरोवर की चर्चित 27 कहानियों को रखा गया है। इनमें ईदगाह, बड़े भाई साहब, ठाकुर का कुंआ, पूस की रात और गुल्ली-डंडा जैसी कहानियाँ भी हैं, जो हर काल में अपनी जय का पताका फहराती रहती हैं। इनके साथ संग्रह की अन्य कहानियाँ भी मन पर अनूठा प्रभाव छोड़ते हुए अपनी जीवन्तता का अहसास दिलाती हैं। सही मायने में ये कहानियाँ आज के जीवन और जगत की विसंगतियों को रेखांकित करते हुए पाठक को ‘भीतर तक झकझोर देती हैं। इनमें मर्म को छू लेने की अद्भुत शक्ति भी मौजूद है।
निश्चित रूप से मानसरोवर की कहानियाँ केवल आप पाठकों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रेमचन्द कथा-साहित्य के मर्मज्ञों, शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये सब एक ही जगह समग्रता से उपलब्ध हैं और ये हर तरह से उपयोगी हैं।

























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