Har Theek Hun ke Peechhe
हम सभी कभी न कभी “मैं ठीक हूँ” कहते हैं, जबकि हमारे भीतर अनगिनत अनकहे शब्द, अधूरी भावनाएँ और गहरा मौन छिपा होता है। ‘हर ‘ठीक हूँ’ के पीछे’ उन्हीं अनसुनी आवाज़ों और अनकहे एहसासों की संवेदनशील यात्रा है। यह पुस्तक उन शब्दों से जन्मी है, जिन्हें लेखिका ने अपने सबसे अकेले पलों में लिखा। जब मन की बातें किसी से कह पाना संभव नहीं था, तब उन्होंने उन्हें कागज़ (या नोट्स ऐप) पर उतार दिया। यही छोटे-छोटे लेख, विचार और भावनाएँ समय के साथ इस पुस्तक का रूप बन गए। कुसुम लता अपनी सहज, ईमानदार और आत्मीय लेखनी के माध्यम से जीवन के उन अनुभवों को साझा करती हैं, जिनसे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी गुज़रता है—अकेलापन, आत्मस्वीकृति, मौन, उम्मीद, स्वीकार और आगे बढ़ते रहने का साहस। उनकी लेखनी यह एहसास कराती है कि हर मुस्कान के पीछे एक कहानी होती है और हर “ठीक हूँ” के पीछे एक पूरा संसार। यदि आपने भी कभी अपनी भावनाओं को शब्दों में नहीं कह पाया, यदि आपने भी जीवन में चुपचाप बहुत कुछ सहा है, या यदि आप ऐसी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं जो सीधे दिल से संवाद करती हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है। ‘हर ‘ठीक हूँ’ के पीछे’ केवल पढ़ने की किताब नहीं, बल्कि महसूस करने का एक अनुभव है—जो शायद आपको अपनी ही कहानी से मिलवा दे।





























Reviews
There are no reviews yet.