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Kanha

ISBN: 9789381005651 Category: Author: Publisher:
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95.00

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Book Condition: New
Format: Paperback
Language: Hindi
Pages: 70

Availability: In stock


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Kanha

कहानी’ जहाँ जीवन की प्रतिनिधि होती है वहीं जीवन्तता की प्राणवायु समाये भी होती है। वह जीवन्तता जिसमें भावनाओं, संवेदनाओं को जीवित रखने की शक्ति भी है तो जीवन की वास्तविक्ताओं को रुबरु कराने की ताकत भी है। इसीलिए प्रेमचंद ने कहानी को ‘जीवन की शक्ति और साहित्य को ‘जीवन के लिए आवश्यक माना है। जब साहित्य स्वस्थ, सजीव और सशक्त होगा तो जीवन स्वतः ही ऊर्जावान और सशक्त होगा।

प्रस्तुत कहानी संग्रह ‘कान्हा’ मेरी उन नौ कहानियों का संग्रह है जिसे मैंने अनुभव और परिवेश में महसुस किया। वो पल जो किसी और के होते हुए भी मेरे अचेतन मन में बैठ गए और कब धीरे-धीरे अंकुरित हो ‘कहानी’ के रुप में सृजित हो गये। साथ ही ‘रंगीन परिन्दा नाटक के माध्यम से बदलती युवासोच उन पर हावी होती भौतिकता, ग्लैमर और उपभोक्तावादी मॉल’ संस्कृति की झलक दिखाना भी मेरा उद्देश्य रहा है।

‘कान्हा’ कहानी ही मेरे इस कहानी संग्रह की आत्मा है। क्यों कि कुछ विचार ऐसे होते हैं कि वो कब अक्षरों में उतर कथा बन गए, यह अनुभूति मेरे लिए अलौकिक व रोमांच भरी रही। ‘कान्हा’ शब्द कान में पड़ते ही हृदय में प्रेम का स्रोत प्रवाहित हो उठाना हर एक सद् की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है और क्यों ना हो, कान्हा तो है ही ‘प्रेम’ का पर्याय। उस प्रेम का जो घट-घट में, कण-कण में व्याप्त है। जिसको किसी धर्म, सम्प्रदाय, जाति, पंथ में नहीं जा सकता। ‘प्रेम’ तो स्वयं ‘परम है और परम तो अगम, अगोचर, सर्वव्याप्त है। ‘प्रेम के इसी सूक्ष्म रुप को एक ‘झलक’ के रुप में ‘कान्हा’ कहानी में दिखाने का प्रयास किया है।

अन्य कहानियों में जहाँ स्त्री मन की कश्मकश है, वहीं अपनी विवशता, द्वन्द पर विजय पा अपने आत्मविश्वास को जगाती दिखती है। इरम, बस अब और नहीं, ‘स्पर्श, ‘महिला दिवस’, ‘जीत’, ‘इम्तिहान’ हैं। वहीं आमली का लोटा कहा अब और नहीं’, ‘स्पर्श, ‘महिला दिवस’, ‘जीत’, ‘इम्तिहान हैं। वहीं आमली का लोटा कहानी जल समस्या को समाधान को प्रेरित करती दिखती है। जिसमें अपने गाँव ‘जाबासर (झुंझुनू) की समस्या को शब्दों में उकेरने का प्रयास रहा है। अन्ततः मुझे आशा है मेरा यह ‘नव दीप आप सभी को कुछ ना कुछ प्रकाश की किरण अवश्य देगा।

‘एक नन्हीं सी ‘शमा जला सकुँ ऐसी हसरत पली है। सूरज ना हो ना सही, प्रेम की खुश्बू बिखरा सकुँ यही साथ भरी है।

Weight280 g
Book Condition

New

Country of Origin

India

Language

Hindi

Pages

70

Product Form

Paperback

Publishers

Raj Publishing House

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