Chinti ki arthi by kaushlendra
असल जिंदगी परीलोक की कहानी नहीं है। यह तो त्रासदियों का दस्तावेज़ है, असल जिंदगी युद्धों से गुज़रती है। ऐसे ही एक युद्ध की कहानी है “चींटी की अर्थी”। कुछ युद्ध सालों-साल चले, कुछ महीनों और कुछ घंटे भर में समाप्त हो गए। लेकिन जो युद्ध प्रेम के लिए लड़ा जा रहा है उसके अंत का कोई छोर नहीं दिखता। इस युद्ध में एकतरफा अनगिनत लाशें गिरी, इतनी लाशें कि गिनती के क्रम में उनका हिसाब करने में धरती के आख़िरी दिन तक का वक्त भी कम पड़ जाए।”




























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