Asadharan Lakshyon Ko Paane Ki Kala
अगर आपको लोगों के हँसने का डर न हो, तो आप क्या हासिल कर सकते हैं? आज के दौर में—जहाँ लोग दूसरों की छोटी-सी गलती पकड़कर उनका मज़ाक उड़ाने के लिए तैयार बैठे रहते हैं—अधिकांश लोग ऐसा कुछ भी करने से बचते हैं, जिस पर लोग हँस सकें। लेकिन स्टीव डी. सिम्स की सोच इससे बिल्कुल विपरीत है। इस पुस्तक में स्टीव बताते हैं कि दूसरों की राय की परवाह किए बिना ऐसे बड़े और दुस्साहसी लक्ष्य कैसे चुनें, जिन्हें दुनिया पहली नज़र में बेवकूफ़ी या पागलपन कहे । माइकल एंजेलो की प्रसिद्ध प्रतिमा डेविड के सामने एक निजी रात्रिभोज आयोजित करने से लेकर स्वयं एलन मस्क के स्पेसएक्स में विशेष दौरा सुनिश्चित करने तक, उनकी हर असाधारण उपलब्धि की शुरुआत एक ही सवाल से होती है— मैं इसे और कितना आगे ले जा सकता हूँ? इसे इतना बड़ा और अनोखा कैसे बनाया जाए कि लोग इसे बेवकूफ़ी समझें? स्टीव इतिहास के ऐसे साहसिक लक्ष्यों की कहानियों, सफल लोगों की विशिष्ट आदतों और अपने लंबे पेशेवर अनुभव से मिली सीखों के माध्यम से दिखाते हैं कि किस तरह आप अपने डर और स्वयं की बनाई सीमाओं से मुक्त होकर अपनी वास्तविक क्षमता तक पहुँच सकते हैं। जब तक आप कुछ असाधारण नहीं कर दिखाते, लोग आपका मज़ाक उड़ाते हैं; और जब आप कर दिखाते हैं, तो वही लोग आपका सम्मान करने लगते हैं। इसलिए ज़रूरत से ज़्यादा सोचने में समय न गँवाइए। ऐसे लक्ष्य चुनिए, जिन्हें दुनिया बेतुका या बेवकूफी भरा समझे। क्योंकि जिस क्षण आप उन लक्ष्यों की ओर बढ़ना शुरू करते हैं, उसी क्षण आप उस ज़िंदगी का दरवाज़ा खोल देते हैं, जिसका आपने हमेशा सपना देखा था ।






























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