Pakshi, Prikriti Aur Paryavaran
प क्षियों पर डॉ. कैलाश चन्द सैनी की लिखी पुस्तक ‘पक्षी, प्रकृति और पर्यावरण’ वर्तमान परिवेश में हिन्दी भाषा में एक महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी कृति है। पुस्तक में पर्यावरण एवं प्रकृति में पक्षियों के महत्त्व को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इसमें प्रकृति के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ के परिणामों से अवगत कराते हुए सतर्कता बरतने हेतु सावचेत किया गया है। मनुष्य और प्रकृति का सम्बन्ध युगों पुराना है तथा दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे के स्वस्थ सहचर्य से ही सम्भव है। लेखक ने इन सम्बन्धों को छायाचित्रों के माध्यम से बहुत ही सुन्दर तरीके से दर्शाया है। डॉ. सैनी ने विभिन्न पारिस्थितिकी तंत्रों में पक्षियों की भूमिका व उनके योगदान को रेखांकित करते हुए बताया है कि पक्षी कैसे बदलते पर्यावरणीय परिवेश व ‘क्लाइमेट चेन्ज’ की परिस्थितियों में स्वयं को ढालने में प्रयासरत हैं। पक्षियों एवं मानव की विचारशीलता, संवेदनशीलता, पूर्वाभास आदि को इस पुस्तक में सारगर्भित तरीके से समाविष्ट किया गया है। लेखक ने सुन्दर छायाचित्रों के माध्यम से पक्षियों व प्रकृति का जो जीवंत चित्रण किया है वह बड़ा ही अनूठा व सराहनीय है। पक्षियों के विभिन्न क्रियाकलापों से मौसम के पूर्वानुमान, मानव जीवन में लोक साहित्य, सिनेमा व लोककला में इनकी भूमिका का उल्लेख भी प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है। मानवी परिदृश्य में पक्षियों का अस्तित्व, उनकी उत्तरजीविता व भविष्य तथा मानव के साथ सह-अस्तित्व को विशेष रूप से संगत छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया है, जो अपने आप में अद्वितीय है।
ST DEN
यहां यह भी उल्लेख किया गया है कि पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियाँ समूचे पारिस्थितिकी तंत्र की संकेतक या ‘की स्टोन प्रजाति’ के रूप में मानव समाज को आने वाले खतरों से किस तरह से आगाह करती हैं। पुस्तक में पक्षियों के जीवन के विभिन्न व्यवहारों जैसे पर्यावास, भोजन, प्रजनन, सामाजिकता, बौद्धिकता, सांकेतिक भाषा, शिकारी प्रवृत्तियां आदि को उपयुक्त छायाचित्रों के साथ प्रकाशित किया गया है। पक्षियों की विभिन्न प्रवृत्तियों एवं व्यवहारों को 24 अध्यायों में सारगर्भित रूप से पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत किया गया है, जो एक विशेष उपलब्धि है। पुस्तक अपने प्रस्तुतीकरण से समाज के विभिन्न वर्गों विशेषकर युवा पीढ़ी में पक्षियों के प्रति संवेदना, उत्सुकता एवं संरक्षण हेतु कर्तव्यबोध कराती है।
डॉ. सैनी ने पुस्तक के माध्यम से विद्यार्थियों में ज्ञानवर्धन के लिहाज से पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों, राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण, शिकारी पक्षियों, लम्बी गर्दन वाले गिद्ध, प्रवासी पक्षियों के लिए भारत में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के आवासों का भी उल्लेख किया है। कला-साहित्य की दृष्टि से भारतीय परिवेश, सिनेमा, लोकोक्तियों एवं कथा-कहावतों आदि में भी पक्षियों को भली-भांति वर्णित किया गया है। पुस्तक के एक परिशिष्ट में भारतीय राज्यों के राज्य पक्षियों के बारे में सटीक एव आवश्यक जानकारियों का सचित्र सकलन बड़ा ही प्रशंसनीय है।
प्रो. अनिल कुमार छंगाणी
विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग






























Reviews
There are no reviews yet.