Baatein Firaq Ki
फ़िराक़ गोरखपुरी को जानना है तो सिर्फ़ उनकी शायरी पढ़ना काफ़ी नहीं है। कभी उन लोगों से भी मिलिए, जिन्होंने उन्हें देखा, सुना, उनके साथ वक़्त बिताया और उनकी डाँट भी खाई है।
रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी उर्दू शायरी के उन विरल शायरों में हैं, जिनका व्यक्तित्व उनकी शायरी जितना ही विशाल, जटिल और दिलचस्प था। वे एक साथ विद्वान, शायर, शिक्षक, संवेदनशील इंसान और अपने मिज़ाज के बेहद अनोखे व्यक्ति थे। उन्हें किसी एक खाँचे में रख पाना आसान नहीं।
‘बातें फ़िराक़ की’ फ़िराक़ की पारंपरिक जीवनी नहीं है। यह उन आवाज़ों का दस्तावेज़ है, जो फ़िराक़ के आसपास की दुनिया से आती हैं। लेखक प्रणव मिश्र ‘तेजस’ ने फ़िराक़ के जीवन से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों और उनसे किसी-न-किसी रूप में जुड़े लोगों से बातचीत की है। मूल रूप से सात साक्षात्कारों के साथ पुस्तक में वैज्ञानिक और शायर गौहर रज़ा का एक अतिरिक्त साक्षात्कार भी शामिल है। इन बातचीतों में फ़िराक़ कभी बेहद आत्मीय दिखाई देते हैं, कभी बेबाक और अप्रत्याशित; कभी कठोर तो कभी बेहद संवेदनशील। अलग-अलग लोगों की यादों से बनती फ़िराक़ की यह तस्वीर पाठक को उनके व्यक्तित्व के कई अनदेखे पहलुओं तक ले जाती है।
रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ गोरखपुरी उर्दू शायरी के उन विरल शायरों में हैं, जिनका व्यक्तित्व उनकी शायरी जितना ही विशाल, जटिल और दिलचस्प था। वे एक साथ विद्वान, शायर, शिक्षक, संवेदनशील इंसान और अपने मिज़ाज के बेहद अनोखे व्यक्ति थे। उन्हें किसी एक खाँचे में रख पाना आसान नहीं।
‘बातें फ़िराक़ की’ फ़िराक़ की पारंपरिक जीवनी नहीं है। यह उन आवाज़ों का दस्तावेज़ है, जो फ़िराक़ के आसपास की दुनिया से आती हैं। लेखक प्रणव मिश्र ‘तेजस’ ने फ़िराक़ के जीवन से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों और उनसे किसी-न-किसी रूप में जुड़े लोगों से बातचीत की है। मूल रूप से सात साक्षात्कारों के साथ पुस्तक में वैज्ञानिक और शायर गौहर रज़ा का एक अतिरिक्त साक्षात्कार भी शामिल है। इन बातचीतों में फ़िराक़ कभी बेहद आत्मीय दिखाई देते हैं, कभी बेबाक और अप्रत्याशित; कभी कठोर तो कभी बेहद संवेदनशील। अलग-अलग लोगों की यादों से बनती फ़िराक़ की यह तस्वीर पाठक को उनके व्यक्तित्व के कई अनदेखे पहलुओं तक ले जाती है।























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