Maut ki Kitab
ख़ालिद जावेद उर्दू कथा-साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हैं। 9 मार्च, 1963 को बरेली, उत्तर प्रदेश में जन्म हुआ। दर्शनशास्त्र और उर्दू साहित्य पर समान अधिकार रखते हैं। रुहेलखंड विश्विद्यालय में पाँच साल तक दर्शनशास्त्र का अध्यापन भी किया है। उनके चार कहानी-संग्रह और चार उपन्यास ‘मौत की किताब’, ‘एक खंजर पानी में’, ‘अरसलान और बहज़ाद’ तथा ‘नेमत ख़ाना’, ‘आख़िरी दावत और अन्य कहानियाँ’ (संकलित कहानियाँ) प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2022 में उनके उपन्यास ‘नेमत ख़ाना’ के लिए भारतीय भाषाओं में दिया जाने वाला साहित्य का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार ‘जेसीबी प्राइज़ फ़ॉर लिटरेचर’ से सम्मानित किया गया है। कहानी ‘बुरे मौसम में’ के लिए उन्हें ‘कथा सम्मान’ दिया गया है। वर्जीनिया में आयोजित वर्ल्ड लिटरेचर कॉन्फ्रेंस-2008 में उन्हें कहानी-पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था। कहानी ‘आख़िरी दावत’ अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के साउथ एशियन लिटरेचर डिपार्टमेंट के कोर्स में शामिल है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियों का हिन्दी, अंग्रेज़ी, जर्मन तथा अन्य भाषाओं में अनुवाद होता रहा है। उनकी दो आलोचना पुस्तकें ‘गैब्रियल गार्सिया मार्केज़’ और ‘मिलान कुंदेरा’ भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
























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