How to Treat Her Right
यह किताब उन सभी लोगों को (चाहे लड़का हो या लड़की) ज़रूर पढ़नी चाहिए जो अपने जीवनसाथी के साथ एक मज़बूत और प्यार भरा रिश्ता कायम रखना चाहते हैं।
पिछले कुछ महीनों में घटीं तमाम घटनाएँ विष्णु के दिल-ओ-दिमाग़ में बार-बार घूमने लगीं। वे तमाम बातचीत (अपने पार्टनर के साथ), जो होनी चाहिए थीं मगर नहीं हुई; वे तमाम बातें जो ‘मुझे परवाह नहीं’ वाले लहजे में हुई; वे तमाम पल, वे तमाम मौके जब उसने अपने पार्टनर से बढ़कार अपने काम या अन्य बातों को प्रमुखता दी। उसे एहसास हुआ कि उन दोनों के बीच जो दूरियाँ पैदा हो गई थीं, वे किन्हीं बड़ी बहसों या मतभेदों के चलते नहीं थीं, बल्कि रिश्ते में आ रहीं छोटी-छोटी दरारों पर समय रहते ध्यान न देने के कारण उभरी थीं। इस तरह अपने भीतर झाँकने और इन सब बातों को जानने-समझने के बाद विष्णु ने एक फैसला किया। वह उसे वापस पाने के लिए जी-तोड़ कोशिश करेगा, मगर बड़े-बड़े वादों के सहारे नहीं, बल्कि उन छोटी-छोटी बातों के जरिए जो उसे यह एहसास दिला सकतीं हों कि वह उसके लिए कितना मायने रखती है। बेशक यह फैसला उसने इस उम्मीद के भरोसे किया था कि शायद, हाँ। शायद अभी इतनी देर नहीं हुई थी कि कोई कोशिश ही न की जा सके।
‘हाउ टू ट्रीट हर राइट’ इन्हीं छोटी-छोटी दरारों और इन्हें भरने के लिए की जा सकने वाली छोटी-छोटी कोशिशों पर रोशनी डालती है। यह मॉडर्न ज़माने के मॉडर्न रिश्तों में पल रहे अनकहे संघर्षों की पड़ताल करती है और दिखाती है कि कैसे छोटे-छोटे से काम, छोटी-छोटी सी बातें उस रिश्ते को फिर से मजबूत भी बना सकती हैं और हमेशा के लिए ख़त्म भी कर सकती हैं, जो कभी अटूट लगता था मगर आज टूटने की कगार पर खड़ा हुआ है।
अपनी सी जान पड़ने वाली कहानियों और व्यावहारिक समझाइशों के ज़रिए यह किताब आपको यह समझने में मदद करती है कि औरतें वास्तव में चाहती क्या हैं: थोड़ी-सी इज़्ज़त, थोड़ी-सी फ़िक्रमंदी, और थोड़ी सी उन्हें यह अहसास दिलाने की कोशिश कि वे आपके लिए कीमती हैं।
“वह (गौतम) भावनाओं को उस तरह समझते हैं,
जिस तरह अधिकांश लोग नहीं समझ पाते।”
– देबलीना भट्टाचार्य, दिस थिंग कॉल्ड लव
“एक इत्मीनान भरी और ईमानदार आवाज़ ।” – सुमित्रा मंडा, इन द साइलेंस यू लेफ्ट बिहाइंड






























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