Madhyakalin Bharat Ka Itihas
प्रस्तुत पुस्तक मध्यकालीन भारत का लिखकर मैं अपने हृदय में अपार हर्ष का अनुभव कर रहा हूं।
इस पुस्तक में 1206 ई. से लेकर 1740ई. तक की घटनाओं का आलोचनात्मक दृष्टिकोण से विस्तृत विवेचन किया गया है। पुस्तक लेखन में शोध पद्धति का सहारा लिया गया है, परन्तु भाषा सर्वत्र सरल एवं शैली बोधगम्य ही रखी गई है, ताकि इतिहास के अध्येता विषय की मौलिकता को आसानी से समझ सकें।
इस पुस्तक में राजनीतिक इतिहास के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया हैं। लेखक ने यथास्थान पर अपने मौलिक मत को प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास किया है।
पुस्तक को आकर्षक रूप में प्रकाशित करने के लिए हम प्रकाशक महोदय के प्रति भी हार्दिक व्यक्त करते हैं।




























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