Hindu Dharm pr Muslimon, Isaiyon tatha Vampanthion ka Aakrman Kyu
सनातन धर्म का सारतत्व क्या है? क्या कारण है कि सहस्त्राब्दियों के पश्चात् भी हिंदू धर्म अपने अस्तित्व को बनाए रखने में सक्षम हो सका और क्या अब इस पर कोई खतरा है? क्या अंधविश्वास के स्थान पर व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से ‘मैं कौन हूँ?’ और ‘क्या कोई ईश्वर है?’ जैसे आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर खोजे जा सकते हैं? मारिया वर्थ ने अपने तैंतालीस (43) विचारोत्तेजक लेखों के इस संग्रह में वैचारिक संघर्षों से भरी इस दुनिया में भारत के प्राचीन ज्ञान की आध्यात्मिक गहराई, वैदिक दर्शन की शक्ति और सनातन धर्म की प्रासंगिकता पर चर्चा की है। इन लेखों में अनेक विषयों को शामिल किया गया है, जैसे कांवड़ यात्रा और पवित्र नगरी हरिद्वार का महत्त्व, धर्मांतरण या मतांतरण और मजहबी किताबों में पाए जाने वाले हिंसक उपदेशों की आलोचना और ईसाईयत के अनेक पहलुओं पर प्रश्न उठाते हुए कड़े शब्दों में पोप को लिखा गया एक प्रभावशाली पत्र आदि। विभिन्न कालखंडों में लिखे गए इन लेखों की प्रासंगिकता आज भी वैसी ही है, जैसी उन्हें लिखते समय थी। अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से पढ़े गए ये लेख चुनौती देते हैं, नई समझ प्रदान करते हैं और प्रेरित करते हैं, साथ ही साथ भारत की गहन आध्यात्मिक विरासत का न केवल सशक्त पक्ष प्रस्तुत करते हैं, बल्कि उसका सम्मानपूर्वक उत्सव भी मनाते हैं।





























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