Bhatkhande Sangeet Paddhati: Samayabaddh That Vargikaran evam Ragang Mimansa”
दुष्यन्त त्रिपाठी सगीत के शास्त्रीय तथा प्रायोगिक पक्ष के समादून आचार्य, लोक, वैदिक संगीत तथा मध्यकालीन संगीत ग्रंथों के विशेषज्ञ, आधुनिक रोजगारोन्मुखी संगीत शिक्षा के हस्ताक्षर, संगीत विषय के विकास तथा छात्र हित हेतु समर्पित एवं लोकपिवशिक्षक हैं। युवाओं को रोजगारपरक दृष्टिकोण देते हुए अनेक नए शैक्षिक आयाम स्थापित किये है। राजस्थान में सगीत शिक्षा के एक आदर्श राजकीय शिक्षण केंद्र की स्थापना, जिसमें परपरा तथा आधुनिकता का संगम, ऑडियो विजुअल लैब, विभागीय पुस्तकालय, वाद्य संग्रहालय, सांस्कृतिक केंद्रों के स्रोत, संगीत शोध केंद्र, रिकार्डिंग स्टूडियो, कॉफ्रेंस रूम, सुन्दर उद्यान, प्रतियोगी परीक्षाओं की निबमित तथा निशुल्क तैयारी, मंच अभ्यास, परिचर्चा, कलाकारों के नियमित कार्यक्रम, निशुल्क जलपान आदि प्रकल्पों द्वारा प्रभावी शिक्षण का साकार किया है। देश के प्रमुख शैक्षणिक तथा चयन बोर्ड में आप मानद सदस्य तथा विषय विशेषज्ञ हैं। 8 पुस्तकें, 50 से अधिक शोध आलेखों का प्रकाशन, 27 लघु शोध कार्यों का निर्देशन, 10 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं के आयोजक, नवोदय विद्यालय, MMTTC RIE, CCRT जैसे राष्ट्रीय सस्थानों में मुख्य प्रशिक्षक एवं सन्दर्भ व्यक्ति, इनके सशक्त लेखन एवं बहुआयामी व्यक्तित्व के परिचायक है।
सम्मान/पुरस्कार संगीत सुर साधक सम्मान, राज्य स्तरीय उच्चशिक्षाशिक्षक सम्मान, संगीत कला क्षितिज सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय शोध आलोक सम्मान, जिया मोईनुद्दीन डागर सम्मान, “Higher Education Excellency Award सगीत कला पारखी सम्मान, गुरु वंदन सम्मान, स्वतंत्रता दिवस सम्मान आदि अनेकों राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित हैं।
सम्प्रतिः अधिष्ठाता, ललित कला संकाय, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर:
विभागाध्यक्ष सगीत, स. ध. राजकीय महाविद्यालय व्यावर (राजस्थान)
वरुण चावला भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के एक गंभीर अध्येता, शोधार्थी एवं साधक कलाकार हैं। संगीत के शास्त्रीय तथा प्रायोगिक पक्ष पर समान अनुशासन बनाए रखते हुए, संगीत गायन में स्नातकोत्तर (एम.ए.). तबला वादन में ‘विशारद’, पाश्चात्य स्टाफ नोटेशन सिस्टम में प्रमाणपत्र, UGC NET-JRF परीक्षा उत्तीर्ण कर पी-एच.डी. शोध कार्य में सलय हैं। संगीत की परपरा, एतिहासिकताके गहन अध्येता वरुण ने तकनीक एवं नवाचारों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत को राष्ट्रीय अस्मिता, संस्कृति एवं पारपरिक मूल्यों के साथ युवाओं में प्रसारित करने कि मुहिम चलाई है। आचार्य कैलाश चन्द्र देव बृहस्पति, ओमकारनाथ ठाकुर, शरदचंद्र श्रीधर परांजपे, रामाश्रय झा, प्रो. प्रेमलता शर्मा, पी. साम्बमूर्ति जैसे वाम्गेयकारों से प्रभावित वरुण चावला का लेखन एवं शोध भारतीय शास्त्रीय संगीत की परपरा को आधुनिक तकनीक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से समझने का प्रयास करवाता दिखता है।
लेखन एवं शोध के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका रखते हुए इनकी पुस्तक ‘भारत के महान संगीतकार व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ भारतीय संगीत परपरा के प्रमुख स्तभों का सुसगत एवं विश्लेषणात्मक विवेचन प्रस्तुत करती हैं राष्ट्रीय एवं अतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित 10 शोध पत्र, संपादित पुस्तकों में प्रकाशित 3 अध्याय, इनकी शोध-दृष्टि और अकादमिक प्रतिबद्धता को दशति हैं। इसी कड़ी में प्रस्तुत पुस्तक संगीतशास्त्र के क्षेत्र में अध्ययनरत विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं सगीत-जिज्ञासु ओं के लिए सग्रहणीय एवं उपयोगी सिद्ध होगी।
सम्प्रतिः बरुण चावला, शोधार्थी संगीत विभाग, स ध. राजकीय महाविद्यालय व्यावर (राजस्थान),





























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