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Sharda Shabhyata Gyan Dharohar

ISBN: 9789375852865 Category: Authors: , Publisher:
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280.00

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Book Condition: New
Format: Paperback
Language: Hindi
Pages: 210

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Sharda Shabhyata Gyan Dharohar

ख्वाजा फारूक रेंजुशात कश्मीर के एक प्रतिष्ठित सूफी चिंतक, विद्वान, लेखक तथा पूर्व वरिष्ठ सिविल सेवक हैं, जिन्हें कश्मीर में सूफी परंपरा की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। वे एक प्रखर बौद्धिक और बहुप्रसारित लेखक हैं तथा अब तक बाईस पुस्तकों की रचना कर चुके हैं, जिनमें कश्मीर की सूफी परंपरा, शैव दर्शन और बौद्ध दर्शन की समृद्ध परंपराओं का विश्लेषण किया गया है। उनके लेखन का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक एकता और अंतरधार्मिक सुद्धाव के संदेश को प्रोत्साहित करना है। जम्मू और कश्मीर सरकार में अपने प्रशासनिक जीवन के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जिनमें अतिरिक्त मंडलायुक्त, विभिन्न जिलों के उपायुक्त, श्रीनगर के आयुक्त, श्रीनगर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक और तीन बार महानिदेशक (डीजी सूचना) का दायित्व शामिल है। वे लगभग एक दशक तक जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के केएएस अधिकारियों के संघ के अध्यक्ष भी रहे। वर्तमान में वे कश्मीर सोसाइटी इंटरनेशनल के अध्यक्ष हैं और इसके माध्यम से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, आध्यात्मिकता और मानव बंधुत्व के संदेश को प्रसारित करने वाले अनेक सम्मेलनों का आयोजन कर चुके हैं। सूफी परंपरा में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत के पूर्व राष्ट्रपति A.P.J. Abdul Kalam और प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा सम्मानित किया गया है। उन्होंने Johns Hopkins University सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्याख्यान दिए हैं। अपने शोध, नेतृत्व और सांस्कृतिक प्रयासों के माध्यम से वे आज भी कश्मीर की सूफी-मानवतावादी परंपरा के पुनर्जागरण के लिए सक्रिय हैं।

प्रो. गीता सिंह वर्तमान में Centre for Professional Development in Higher Education (CPDHE), University of Delhi की निदेशक हैं और भारतीय उच्च शिक्षा जगत की एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, शोधकर्ता तथा प्रशासक के रूप में विख्यात हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा और अकादमिक विमर्श में पुनस्र्स्थापित करने के लिए वे निरंतर सक्रिय रही हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित 23 से अधिक पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है तथा देशभर में 500 से अधिक उच्च शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया है। पिछले 17-18 वर्षों से कश्मीर की ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और शैक्षिक इतिहास पर निरंतर अकादमिक अध्ययन एवं शोध कार्य में संलग्न हैं। वे भारत सरकार तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों की कई उच्च स्तरीय समितियों की सदस्य हैं। छात्र जीवन में वे राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी भी रही है। वे पिछले लगभग १०-25 वर्षों से मुस्लिम समाज के भीतर बौद्धिक विमर्श को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही हैं। उनकी चर्चित कृति “राम मंदिर: राष्ट्र मंदिर” भी इसी दीर्घकालिक वैचारिक साथना और शोध का परिणाम है, जिसमें उन्होंने लगभग पच्चीस वर्षों के अध्ययन और संवाद को समाहित किया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित व्याख्यानों, संवादों और बौद्धिक चर्चाओं के माध्यम से वे ऐसा सकारात्मक वैचारिक वातावरण निर्मित करने का प्रयास कर रही हैं, जो भारतीय समाज की सांस्कृतिक एकात्मता, पारस्परिक सद्भाव और राष्ट्रीय समन्वय की भावना को सुदृढ़ करता है। उनके विचारों का मूल आवारु यह है कि भारत की प्रगति और समृद्धि केवल एकात्म भाव, संवाद और सहअस्तित्व की भावना के माध्यम से ही संभव है।

Weight350 g
Book Condition

New

Country of Origin

India

Language

Hindi

Pages

210

Product Form

Paperback

Publishers

‎ Suruchi Prakashan

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