Teen Batti Ke Rama
उर्दू साहित्य में सांप्रदायिकता के ज़हर को ख़त्म करने के लिए कई आला कहानियाँ लिखी जा चुकी हैं, उनमें मंटो की “टोबा टेक सिंह” को तो आज एक लीजेंड का दर्जा हासिल है। हाल ही में अली इमाम नक़वी की लिखी कहानी “डोंगरवाड़ी के गिद्ध” भी मेरे ख़्याल में इस विषय पर एक क्लासिक कहानी है।
– जोगिंदर पाल
अली इमाम नक़वी बहुत अच्छी नस्र (गद्य) लिखते हैं, हालाँकि उनकी कुछ कहानियों को पढ़कर यह प्रभाव फ़ौरन नहीं उभरता, क्योंकि उनकी अक्सर कहानियों में स्थानीय बोली का तत्व प्रमुख होता है। कहानी लेखन की एक खूबी ये भी है कि इसके संवादों में स्थानीय रंग बे-रोक-टोक आ सके। मुंबई के निचले तबके के रहन-सहन की समझ और उनकी बोली का सफ़ल इस्तेमाल अली इमाम नक़वी को मुंबई के कथाकारों में विशिष्ट बनाता है।
– सैयद मोहम्मद अशरफ़
“तीन बत्ती के रामा” के बारे में पिछले दिनों शम्सुल हक्क़ उस्मानी साहब से बड़ी देर तक बातचीत रही। मैं अली इमाम नक़वी के लेखन और कहानियों का प्रशंसक रहा हूँ, वह मेरे दौर के बड़े कथाकारों में से एक हैं।


























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