Alexander Cunningham ka Aankhon Dekha Bharat
अलेक्जेंडर कनिंघम का जन्म सन् 1814 तथा परिनिर्वाण 1893 में लंदन में हुआ था। 19 साल की उम्र में वे भारत की ब्रिटिश आर्मी में इंजीनियर के रूप में आए। इतिहास व संस्कृति की चाह के जुनून में 21 साल की उम्र में अपने पैसों से सारनाथ की खुदाई करवाकर प्राचीन स्तूप को ढूँढ निकाला। भारतीय पुरातत्व में आपके महान योगदान के लिए’ फादर ऑफ इंडियन आर्कियोलोजी’ के सम्मान से नवाजा जाता है। इस विभाग के वे पहले डायरेक्टर जनरल थे। आपके उत्खननों ने न केवल तथागत बुद्ध को ऐतिहासिक सिद्ध किया बल्कि उनसे संबंधित सभी स्थलों का पता संसार को बताया। आपने चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग और फाहियान के यात्रा वृत्तांतों को आधार बनाकर तक्षशिला, स्यालकोट, बैराट, संकिसा, श्रावस्ती, कौशांबी, वैशाली, नालंदा आदि अनेक बौद्ध स्थलों की उत्खनन द्वारा ऐतिहासिक पुष्टि की। आपने भारतीय इतिहास के कई अंधेरे पहलुओं से पर्दा उठाया। जम्बूद्वीप की धरती में दबे हुए बुद्ध को बाहर लाए गए और बताया कि कैसा था बौद्धकाल का समृद्ध और खुशहाल भारत। सर मेजर जनरल कनिंघम का जन्म ब्रिटेन में हुआ लेकिन मन भारत के प्राचीन खंडहरों में रमा। मानव जगत आपके महान योगदान के प्रति कृतज्ञ है।
























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