यह कारवां आज जिस जगह पर है, मैं इसे बड़ी मुसिबतों के साथ, असहनीय शारीरिक कष्ट सहकर, अपने विरोधियों से संघर्ष कर व मुश्किलों का सामना करके लाया हूं। तुम्हारा कर्त्तव्य है कि यह कारवां सदा आगे ही बढ़ता रहे. चाहे कितनी ही मुश्किलें व रूकावटें क्यों न आए। यदि मेरे अनुयायी इसे आगे न बढ़ा सकें तो यहीं छोड़ दें, लेकिन किसी भी हालत में इसे पीछे न जाने दें. यही मेरा अंतिम संदेश है।
भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर
डॉ. एमएल. परिहार का जन्म 14 अगस्त 1960 को ग्राम करणवा, जिला पाली, राजस्थान मैएक श्रमण परिवार मेहुआ था। जहां श्रम, संघर्ष और सत्संग का सुंदर ताना बाना है। इन्होंने वेटरनरी कॉलेज, बीकानेर से सर्जरी में पी.जी. किया। आप निदेशक, पशुपालन विभाग, राजस्थान के पद से ऐच्छिक सेवानिवृत्त हुए है। डॉ परिहार ने घातक रैबीज रोग को नियंत्रित करने और लावारिस डॉग्स की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए 1994 में “की होल स्पेयिंग” ऑपरेशन की आधुनिक तकनीक शुरू की। यह तकनीक आज देश मेंबहुत सफल है। डॉ. परिहार जर्नलिज्म मॅमी ग्रेजुएट है। आप विभिन्न समाचार पत्रों पत्रिकाओं में पशुचिकित्सा, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक विषयों और मानवतावादी बौद्ध धम्म पर लम्बे समय से लेखन कर रहे है। इस सम्बंध में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, फ्रांस, इटली, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, हांगकांग, थाईलैंड, हॉलैंड, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, वियतनाम सहित कई देशों की यात्राएं की है। इनकी विभिन्न विषयों पर लगभग 25 पुस्तकें प्रकाशित हुई है। इन्होंने ऑल इंडिया रेडियो और डीडी-1, जयपुर दूरदर्शन पर समाचार वाचक और विषय विशेषज्ञ के रूप मेंभी लगभग 25 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी है।
























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