Buddha Dhamm ka Saar
प्रो.नरसु डायनेमिक्स फिजिक्स के जाने माने वैज्ञानिक थे। सत्य तक पहुँचने के माध्यम के रूप में विज्ञान उनके लिए जुनून था। इसी कारण तर्क, विवेक, विज्ञान तथा अनुभव की कसौटी पर खरा उतरने वाला बुद्ध का मार्ग उन्हे प्रिय था। उन्हें बचपन में ही बुद्ध धर्म के प्रति रुचि हो गई थी। पूज्य अनागारिक धम्मपाल के प्रशंसक और मित्र प्रो. नरसु ने बुद्ध धम्म को पुनर्जीवित करने के लिए दक्षिण भारत में बहुत काम किया और 1909 से 1928 तक महाबोधि सोसायटी के मद्रास प्रतिनिधि रहे। उनके लिखी प्रसिद्ध किताबों में द एसेंस ऑफ़ बुद्धिज्म, व्हाट इस बुद्धिज्म, बुद्धिज़्म इन नूतशेल, स्टडी ऑफ़ कास्ट आदि प्रमुख हैं। प्रो. नरसु एक आधुनिक बुद्धिस्ट, साइंटिस्ट और समाज सुधारक थे। उन्होंने समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था, ऊँच-नीच व कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। गरीब, शोषित, वंचित समाज से उनका घनिष्ठ जुड़ाव रहा। वह कई प्रगतिशील और सुधारवादी संगठनों से जुड़े हुए थे। 14 जुलाई 1934 को 73 वर्ष की उम्र में उन महान वैज्ञानिक, धम्म सेवक, समाज सुधारक का परिनिर्वाण हुआ। उनका योगदान अमर है। वह अपने समय से बहुत आगे थे।
























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