Pratidarsh
इस उपन्यास की कहानी केवल स्वर्णकांति जैसी किसी एक सुपर मॉडल के अपूर्व सौंदर्य और समर्पण की कहानी नहीं है, बल्कि ये हेमवती, मालविका, सुकेश, चंद्रवर्मन जैसे पात्रों के संपूर्ण अस्तित्व की प्रतिछाया भी है। उनके संघर्षों और समर्पण की प्रतिछाया भी है। या कहें कि ये खजुरवाहिका के आज के खजुराहो तक पहुंचने की यात्रा के प्रथम पड़ाव की कहानी है। कैसे एक स्त्री का लांक्षित होकर बहिष्कृत होना एक विशाल साम्राज्य की नींव रखता है और उसे समृद्धि और कला से परिपूर्ण करता है। यहां जीवन के एक ओर देह का धर्म है तो दूसरी ओर मोक्ष की मानवीय आकांक्षा, और इनके बीच में काम को नवसृजन का आधार बनाकर भविष्य गढ़ती प्रकृति… इस यात्रा में और भी बहुत कुछ ऐसा जो रोमांचित करेगा। कुल मिलाकर मनुष्य की देह और जीवन को भीतर और बाहर से परिभाषित करती तार्किक अभिव्यक्ति है “प्रतिदर्श खजुराहो, किंवदंतियों से कला तक”






























Reviews
There are no reviews yet.