Goli
वह एक सुंदर तरुण, भावुक और प्रेमी पुरुष था! उसकी आंखे मेरे लिए प्यारी थी, शरीर मेरे लिए बुखा था! उसकी भूख और प्यार मेरी आँखों से ओझल न थी! रजा के जर्जर और रोगी शरीर तथा घावों से भरे हुए शरीर की अप्रेक्षा सुसकी जवानी का भरा-पूरा गठीला परिश्रमी शरीर मेरे लिए कम लोभ की वास्तु न थी! आखिर वो मेरा परिणित पति था, मई उसकी व्यवाहिक स्त्री थी.





























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