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Kota Kshetra ki Murtikala

ISBN: 9789381005996 Category: Author: Publisher:
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Original price was: ₹495.00.Current price is: ₹450.00.

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Book Condition: New
Format: Paperback
Language: Hindi
Pages: 290

Availability: In stock


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Kota Kshetra ki Murtikala

यद्यपि कोटा के राजनैतिक इतिहास पर अनेक शोध कार्य प्रकाश में आए हैं तथापि ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण यहाँ के मंदिरों एवं मूर्तिकला का अध्ययन अछूता रह गया है। प्रस्तुत शोध ग्रन्थ पूर्वलिखित ग्रन्थों के अध्ययन से परे है। इसमें राजनैतिक इतिहास से हटकर यहाँ की मूर्तिकला एवं उसके शैलीगत विकास पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। प्रस्तुत ग्रन्थ “कोटा क्षेत्र की मूर्तिकला में 5वीं से 13वीं शताब्दी ई. की कालावधि में कोटा क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों एवं पुरास्थलों के ध्वंसावशेषों एवं मूर्तियों की प्रथमतः गवेषणा की गई है।

कला के विविध रूप सृष्टि की सनातन आधार भूमि है। सृष्टि की रचना का मूल कला ने ही जन्माया। अछोर प्रकृति के विभिन्न परिदृश्य देखकर जब हमारा हृदय आहलाद का अनुभव करता है तो उसके कर्त्ता की निपुणता पर मुग्ध हो उठते हैं। इस मुग्धता का आधार होता है चाक्षुष राग। यही चाक्षुष राग सौन्दर्य दृष्टि बनकर जब प्रकटता है तो हम प्रत्येक उपकरण में प्रकृति – नटी के अद्भुत लास्य को सौन्दर्य दृष्टि की संज्ञा दे बैठते हैं। यह सौन्दर्य दृष्टि विधाता की आदि कला है। इस कला के विस्तार पर विस्मयाकृष्ट होकर विधाता, उस सृष्टिकर्त्ता ने विचार मन्थनोपरान्त जीवन को अवतरित किया था। उसने जीवन के ही उपभोग और उपयोग हेतु सौन्दर्य दृष्टि के अपार सम्भार इस प्रकृति को निश्चित कर दिया। साथ ही यह निर्देश भी दिया कि “इस अपार सम्पदा का उपयोग करने के लिए लिए तुमको अधिकारी बना रहा हूँ। कहीं इसका दुष्परिणाम न भुगतना पड़े, इसलिए तुम्हें एक संगिनी दे रहा हूँ, वह है कला। यह कला तुम्हारी चिरसंगिनी रूप सहायिका रहेगी। अमोघ शक्ति है यह। यह तुम्हारे लिए प्रेरणा स्त्रोत होगी। तुम इसकी रक्षा करना, कभी इसकी अवमानना न हो।” अस्तु ! जीवन अपने साथ कलारूप एक संगिनी लेकर ही धरती पर अवतरित हुआ

Weight450 g
Book Condition

New

Country of Origin

India

Language

Hindi

Pages

290

Product Form

Paperback

Publishers

Raj Publishing House

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