Aur Bhi Dukh Hain
हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे
उर्दू शाइरी की दुनिया में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ एक ऐसी बुलन्द और रौशन आवाज़ हैं, जिनकी शाइरी ने मोहब्बत को सिर्फ़ व्यक्तिगत एहसास तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे इंसानी दर्द, सामाजिक सरोकार और बेहतर दुनिया के ख़्वाब से जोड़ दिया। उनके यहाँ इश्क़ और इंक़िलाब एक-दूसरे के मुक़ाबिल नहीं, बल्कि एक ही एहसास के दो रंग दिखाई देते हैं। फ़ैज़ के अल्फ़ाज़ में नर्मी भी है, प्रतिरोध भी, उदासी भी है और उम्मीद भी। उनकी शाइरी अपने दौर की गवाही भी देती है और आने वाले समय के लिए रौशनी भी बचाकर रखती है। उनका सबसे बड़ा कमाल ये है कि उन्होंने उर्दू रूपकों को विस्तार दिया। जैसे रात उनके यहाँ अत्याचार का रूपक बन गई है। उर्दू की क्लासिकी शाइरी से अपना रिश्ता जोड़ेते हुए उन्होंने आधुनिक तर्ज़-ए-इज़हार अपनाया। ये पुस्तक हिंदी पाठकों को फ़ैज़ की उसी खूबसूरत, संवेदनशील और विचार-भारी दुनिया से रू-ब-रू कराने का एक प्रयास है, जहाँ शाइरी सिर्फ़ पढ़ी नहीं जाती, महसूस भी की जाती है।


























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