0.00
0

JAAT PAAT KA VINASH

ISBN: 9789393606235 Category: Author: Publisher:
ISBN: 9789393606235 Category: Author: Publisher:
Price:

249.00

Price:

249.00

Book Condition: New
Format: Paperback
Language: Hindi
Pages: 140

Availability: In stock


Deals
Deals
Deals
Days
Hours
Minutes
Seconds

JAAT PAAT KA VINASH

जात-पाँत का विनाश डॉ. भीमराव अंबेडकर की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रथा केवल सामाजिक असमानता ही क्रांतिकारी कृति है। यह पुस्तक मूल रूप से 1936 में लिखी गई थी और भारतीय समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था की तीखी आलोचना करती है। अंबेडकर ने इस ग्रंथ में बताया कि जाति प्रथा केवल नहीं, बल्कि मानवता के लिए भी एक बड़ा अभिशाप है।

इस पुस्तक में अंबेडकर ने हिंदू धर्म की उन परंपराओं और शास्त्रों की आलोचना की है, जो जाति व्यवस्था को समर्थन देते हैं। उनका मानना था कि जब तक जाति प्रथा समाप्त नहीं होगी, तब तक समाज में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व स्थापित नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक सुधार के बिना राजनीतिक सुधार अधूरा है।

“जात-पाँत का विनाश” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आह्वान है। इसमें अंबेडकर ने लोगों से अपील की है कि वे पुरानी कुरीतियों को त्यागकर एक समानतामूलक समाज का निर्माण करें।

यह कृति आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि यह हमें समानता, न्याय और मानव अधिकारों के महत्व को समझने की प्रेरणा देती है।

Weight320 g
Dimensions19 × 12 × 4 cm
Book Condition

New

Language

Hindi

Country of Origin

India

Pages

140

Product Form

Paperback

Publishers

‎ EMPTY CANVAS PUBLISHERS

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “JAAT PAAT KA VINASH”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recognized by Amazon – 4 Years in a Row.

Recognized by Amazon

4 Years in a Row

Popular With Our Readers

Talekart India

Talekart India

Need Help? Chat with us on Whatsapp

I will be back soon

Talekart India
Hi 👋 ✦ Namaste 🙏
WhatsApp