Amber Jaipur ke Pramukh devalaya
डॉ. रेनु मीना, व्याख्याता, इतिहास लिखित यह पुस्तक आम्बेर-जयपुर के प्रमुख देवालय : सांस्कृतिक अध्ययन, अत्यन्त रोचक और सूचनाप्रद है। इस पुस्तक में आम्बेर के देवालयों के साथ जयपुर के उत्तर मध्य कालीन मन्दिरों का परिचय दिया है। इस विषय पर हिन्दी में अधिक नहीं लिखा गया है, इसकी आवश्यकता थी। हमें आशा है, यह पुस्तक विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए भी अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी।
डॉ. चन्द्रमणि सिंह
निदेशक, अभिलेखागार, सिटी पैलेस, जयपुर
डॉ. रेनु ने अपनी इस पुस्तक में आम्बेर जयपुर के मन्दिरों पर शोधपूर्ण और विस्तृत अध्ययन करते हुए इनके स्थापत्य और कलात्मक वैभव को बहुत सुन्दर ढंग से उजागर किया है। इनका यह प्रयास सराहनीय है। मुझे पूरी आशा और विश्वास है कि यह पुस्तक इतिहास के विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए बहुत रुचिकर एवं उपयोगी सिद्ध होगी।
डॉ. राघवेन्द्र सिंह मनोहर
विभागाध्यक्ष इतिहास
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दौसा
डॉ. रेनु मीना ने जयपुर एवं आमेर के मंदिर स्थापत्य एवं मूर्ति शिल्प की परम्परा का सांगोपांग अध्ययन किया और उसका ग्रंथीकरण इस ‘आम्बेर-जयपुर के प्रमुख देवालयः एक सांस्कृतिक अध्ययन’ के माध्यम से कला के पिपासुओं के सामने प्रस्तुत किया है। राजस्थान अपने कला वैशिष्टय के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। उसी कड़ी में जयपुर एवं आमेर का मंदिर स्थापत्य एवं मूर्ति शिल्प अपनी अनूठी पहचान रखता है। यहां के बड़े से छोटे, नवीन से लेकर प्राचीन लगभग सभी मंदिरों का विवरण उसके स्थापत्यीय लक्षणों के साथ प्रस्तुत किया है. आशा करती हैं कि प्रस्तुत कृति कला के विद्यार्थियों और सुधि पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी






























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