Aamer Sthapatya avam Chitrakala
आमेर स्थापत्य एवं कला आमेर राज्य के इतिहास की क्रमबद्ध प्रस्तुती के साथ वास्तु कला एवं संस्कृति का कलात्मक सौन्दर्यबोध के साथ अभिव्यक्ति एक सार्थक एवं सारगर्भित प्रयास है
प्रो. श्याम लाल मीणा
प्राचार्य राजकीय पी.जी. महाविद्यालय, टॉक, राजस्थान
राजस्थान के इतिहास में कलात्मक वैभव के लिये आमेर का विशिष्ट स्थान रहा है जहाँ के वास्तु शिल्प मूर्ति एवं चित्रकला की कलात्मक परम्परा को विशिष्टता के साथ इस पुस्तक में पिरोया है जो कला पाठकों के साथ-साथ शोध अध्येताओं के लिये भी महत्वपूर्ण एवं सार्थक होगी।
डॉ. एम. के. शर्मा ‘सुमहेन्द्र’ निदेशक (दृश्यकला)
जवाहर कला केन्द्र, जयपुर
पुस्तक कला एवं सांस्कृतिक इतिहास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कीर्तिमान है। जयपुर की प्राचीन राजधानी आमेर के सांस्कृतिक वैभव के ऐतिहासिक विवरणों के सत्यापन के साथ ही कला के अद्यतन अनछुए पक्षों की व्याख्या भी की गयी है। लेखिका ने स्वयं वहाँ जाकर आमेर किले तथा अन्य स्मारकों की वास्तु तथा मूर्तिकला की विशेषताओं की व्याख्या की है। क्षेत्रीय कला इतिहास के क्षेत्र में लेखिका का प्रयास सराहनीय है।
डॉ. नीलिमा वशिष्ठ
सेवा निवृत्त
विभागाध्यक्ष चित्रकला विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर





























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