Rajasthan Ke Lok Vadya
श्री विष्णु प्रसाद राजस्थान की समृद्ध सागीतिक परंपरा में उदीयमान युवा हस्ताक्षर श्री विष्णु प्रसाद हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत, गजल गायन एवं राजस्थानी लोकसंगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं। सगीत-परंपरा से अनुप्राणित परिवार में जन्म होने के कारण आपने अपनी दादी स्व. मधु देवी एवं पिता श्री देवाराम जी से बाल्यकाल से ही संगीत की विधिवत शिक्षा ग्रहण की।
शास्त्रीय एवं प्रायोगिक संगीत साधना के समन्वित अनुशीलन में आपने स्नातकोत्तर (गायन) में विश्वविद्यालय की वरीयता सूची में स्थान प्राप्त किया तथा NTA-UGC NET परीक्षा में लगातार तीन बार JRF उत्तीर्ण कर अपनी शैक्षिक मेधा का परिचय दिया।
गायन के साथ-साथ आप हारमोनियम, भपंग, खड़ताल, मोरचंग, नगाड़ा, तबला एवं ढोलक जैसे विविध वाद्यों के दक्ष वादक भी हैं। अनेक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं एवं युवा कला महोत्सवों में विजेता रहने के साथ ही आप राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाओं में विषय विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय सहभागिता निभा चुके हैं। आपके सात शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं तथा प्रस्तुत कृति आपकी प्रथम पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो रही है।
संप्रति : जे. आर.एफ. शोधार्थी, संगीत विभाग मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर
कविता देवी राजस्थानी मांड गायन की राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित (‘सुरश्री’) कलाकार, शास्त्रीय गायन एवं वादन की बहुमुखी प्रतिभा से सम्पन्न एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं। आप शास्त्रीय गायन के साथ-साथ तबला, खड़ताल, मोरचंग, ढोलक, भपंग एवं हारमोनियम जैसे विविध वाद्यों की कुशल वादिका हैं तथा युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक रूप में स्थापित हैं।
संगीत के सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों पक्षों पर समान अधिकार रखते हुए आपने NTA-UGC NET परीक्षा तीन बार उत्तीर्ण कर अपनी विद्वत्ता का प्रमाण प्रस्तुत किया है। पारिवारिक संगीत परंपरा से समृद्ध आपकी शिक्षा आपकी दादी स्व. मधु देवी एवं पिता श्री देवाराम जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुई।
आप आकाशवाणी की ‘बी’ ग्रेड कलाकार हैं (मांड गायन एवं ढोलक वादन) तथा संस्कार भारती द्वारा लोकगायन एवं लोकवाद्य के लिए ‘गुरु वंदन सम्मान’ से अलंकृत की जा चुकी हैं। आपके सात शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर से वर्ष 2025 में स्नातकोत्तर संगीत (कंठ) में स्वर्णपदक प्राप्त कर आपने अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता सिद्ध की है।
सप्रति : सहायक आचार्य (संगीत-कंठ) (SFS, अतिथि संकाय) सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय





























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