Gagar Mein Sagar
वर्तमान स्वार्थपरक परिवेश में नैतिकता ताक पर रखे ‘शो-पीस’ की तरह हो गई है। अधिकांश व्यक्त्ति ध्वस्त होते मानवीय मूल्यों तथा संकीर्ण एवं संकुचित दृष्टिकोण के कारण परेशानियों एवं पीड़ाओं से त्रस्त हैं। युवा पीढी गलाकाट प्रतियोगिताओं एवं प्रतिस्पर्धाओं के दबाव का दंश झेल रही है। ऐसे विषम वातावरण में विद्यार्थी, जिज्ञासु और ज्ञान पिपासु युवा ऐसी पुस्तकों की तलाश में रहते हैं, जो उन्हें सही राह दिखा सके। प्रेरणादायी विचारों से रोशनी प्रदान कर उनका गार्गदर्शन कर सके।
इस दिशा में डॉ. कैलाश चन्द सैनी की पुस्तक ‘गागर में सागर’ एक अभिनव एवं सार्थक प्रयास है। इस पुस्तक के प्रेरणात्मक विचार पाठकों के जीवन में आदर्श व्यक्तित्व के विकास एवं चरित्र निर्माण में सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करेंगे।
सद्गुणों का सवंर्धन आज की महती आवश्यकता है जिसको पूरा करने का सार्थक प्रयास डॉ. सैनी ने इस पुस्तक में किया है। पुस्तक में आशावादी दृष्टिकोण, आत्मविश्वास, आत्मावलोकन, आस्था, अनुशासन, कृतज्ञता, प्रतिभा, क्षमा, श्रद्धा जैसे सद्गुणों से संस्कारित करने वाले सारगर्भित एवं बोधगम्य आलेख अध्ययन और अनुशीलन की दृष्टि से काफी प्रेरणास्पद हैं। आशा है पुस्तक ‘मागर में सागर’ यथा नाम तथा गुण सिद्ध होकर पाठकों की पसंदीदा पुस्तक बनेगी।





























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