हम में से कई के लिये ये दुनिया सिर्फ समस्याओं का पिटारा है; और हम अक्सर ही हीन भावनाग्रस्त रहते हैं। दूसरी ओर, हम में से अधिकांश अपने अति आत्मविश्वास के जरिये स्वयं को किसी न किसी वक्त परेशानी में भी डाल चुके हैं। जीवन में हमारी भावनायें दीनता एवं अति-उत्साह के बीच झूलती रहती हैं, किन्तु हम इन शब्दों- ‘सोचो तो बड़ा!’ के जरिये स्वयं को सफलतापूर्वक भविष्य की ओर अग्रसर कर सकते हैं।
‘सोचो तो बड़ा!’ – यह विचार ‘सकारात्मक रहो!’ एवं ‘साहसी बनो!’ दोनों का सहचर है।
जीवन के इस काल को अपने सपनों के भविष्य के निर्माण में इंजन की तरह से प्रयोग में लाने का साहस करें। उसके लिये ऊँचे सपने देखें और सदैव अपना सर्वोत्तम योगदान करें।
सर्वप्रथम, ‘सोचो तो बड़ा!’ जैसा महत्वपूर्ण कदम उठायें। तत्पश्चात अपनी मौलिक प्रतिभा के साथ उस मार्ग पर अग्रसर हों। सफलता के जो भी सपने आपने संजोये हैं यह पुस्तक उन्हें साकार करने में आपकी मददगार रहेगी।
आध्यात्मिक गुरू, समकालीन दूरदृष्टा तथा हैपी साइन्स के संस्थापक रयुहो ओकावा ने सत्य और आनन्द के पथ पर अपना जीवन समर्पित किया है।
सन 1956 में जापान में जन्मे, ओकावा ने टोकियो में कानून की पढ़ाई की और फिर न्यूयॉर्क में इंटरनेशनल फाइनेंस की शिक्षा प्राप्त की। सन 1986 में न्यूयॉर्क में एक प्रमुख जापानी ट्रेडिंग हाउस से अपने बिजनेस कॅरियर को अलविदा कहते हुए उन्होंने हैपी साइन्स की स्थापना की। सन 1987 में उन्होंने आइ आर एच प्रेस के. लि. की स्थापना की और तब से ओकावा की 2,850 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें द लॉज़ ऑफ द सन, द गोल्डन लॉज़ और द लॉज ऑफ इंटरनिटी जैसी शानदार बिक्री वाली पुस्तकें भी शामिल हैं।





























Reviews
There are no reviews yet.