Ratanankit Parv
रतनांकित पर्व
रतन टाटा ने अपने जीवन में लोगों और संस्थाओं को जोड़ा। इसकी नींव थी उनकी नैतिकता पर आधारित व्यावसायिक सोच। व्यावसायिक कौशल, दिए गए वचन को निभाने की आदत, काम में सटीकता और निरंतर प्रगति का जुनून-इन गुणों के बल पर वे हर काम को सफलता तक पहुँचाते थे। खास बात यह थी कि उन्होंने यह सब बिना किसी अनैतिक तरीके का सहारा लिए किया। अपने काम के प्रति पूर्ण समर्पण और उत्कृष्टता की चाह के कारण वे एक सच्चे ‘परफेक्शनिस्ट’ माने गए। इसी वजह से वे देश के सबसे सम्मानित और प्रतिष्ठित उद्योगपतियों में शामिल हुए।
वे मानते थे कि जो भी काम किया जाए, वह बेहतरीन और पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाए। इसी सोच ने उन्हें ऐसा उद्यमी बनाया, जिस पर पूरे देश को गर्व है। वे केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं थे, बल्कि एक आदर्श, दानशील और पारदर्शी व्यक्तित्व भी थे। नैतिकता और मूल्यों पर आधारित नेतृत्व उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। अपने पूरे कार्यकाल में और उसके बाद भी उन्होंने इन सिद्धांतों का पालन किया। उनके सार्वजनिक और निजी जीवन में यह प्रतिबद्धता बार-बार दिखाई देती है।






























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