धम्मपद’ पर दी गई OSHO Talks का दूसरा भाग
“बुद्ध अनूठे हैं। ध्रुव तारा हैं। तारे तो बहुत हैं, लेकिन ध्रुव तारा एक है। बुद्ध ध्रुव तारा जैसे हैं। उनके साथ मनुष्य की चेतना के इतिहास में एक नए अध्याय का सूत्रपात हुआ। बुद्ध के साथ कुछ नए का जन्म हुआ। बुद्ध के साथ एक क्रांति उतरी मनुष्य की चेतना में। उस क्रांति को समझना जरूरी है, तभी हम बुद्ध के वचनों को समझ पाएँगे। ये वचन साधारण नहीं हैं, ये क्रांति के उद्घोष हैं।
ओशो
भगवान बुद्ध की सुललित वाणी ‘धम्मपद’ पर प्रश्नोत्तर सहित पुणे में हुई सिरीज के अंतर्गत दी गई 122 OSHO Talks में से ये 10 (11 से 20) OSHO Talks हैं। मानव मात्र के अन्तर्मन को उद्वेलित कर देने वाले ओशो इसमें शांति, आनंद और ऊर्जा की वर्षा की बात कहते हैं और रूपांतरण के साथ-साथ दमन की व्याख्या करते हैं। उनके ये प्रवचन मोह लेने वाले हैं।
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
* आनंद की दशा में क्या बस फूल ही फूल हैं. काटे क्या एक भी नहीं?
* क्या क्षणभंगुरता का बोध ही जीवन में क्षण-क्षण जीने की कला बन जाता है?
* क्या जीवन में सभी कुछ नदी-भाव संयोग है? बुद्ध भी? बुद्धाच भी?
* बुद्ध के होवा में और उमर खय्याम की शराब में क्या समाजाला है?




























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