ओशो द्वारा लिखित बहुरि न ऐसो दांव के सभी प्रश्नोत्तर प्रवचनों का एकमात्र प्रामाणिक संकलन।
सदी के सबसे महान उपदेशक ओशो चाहते हैं, विचार समाप्त हो जाए और आखिरी क्षण तक बांसुरी बजती रहे. कभी शब्द में, कभी शून्य में। ओशो के पास प्रेम है। प्रेम की शराब है। थोड़ा-थोड़ा पिलाने में उनका भरोसा नहीं। डूबा देना चाहते हैं, प्रेम की शराब में। वह आमंत्रण देते हैं डूबने का… मुक्त हो जाने का।
ओशो कहते हैं- सारे धर्म मेरे हैं, जहां-जहां मैं इनमें देखूंगा कि लोगों ने गन्दगी मिलाई है, उसकी मैं आलोचना करूंगा। मेरे धर्म हैं, मैं अधिकारी हूं कि अपने धर्मों में कचरा न मिलने दूं। मैं किसी और के धर्म की आलोचना नहीं कर रहा हूं।
मुझसे बचो मत। व्यर्थ समय मत गंवाओ, समय थोड़ा है। और फिर पता नहीं, मुझ जैसे व्यक्ति से कब मिलना हो हो या न हो।



























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